
KGMU में बाहर से लैंस-दवा मामले में एक्शन, Pro-VC डॉ. अपजित कौर को पद से हटाया
केजीएमयू में मरीजों से बाहर की दुकानें से दवा और लेंस मंगाने की जांच रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है।
Lucknow News: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के नेत्र रोग विभाग में मरीजों को अस्पताल के बजाय निजी मेडिकल स्टोर से महंगे लेंस और दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के आरोपों में बड़ा एक्शन हुआ है।
मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपजित कौर को प्रो-वाइस चांसलर (Pro-VC) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीनमेरी) की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अंजू अग्रवाल को नया प्रो-वीसी नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री जनता दर्शन में शिकायत के बाद जांच
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंची एक शिकायत के बाद गरमाया था। गोरखपुर से आए एक मरीज ने आरोप लगाया था कि केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में इलाज के दौरान उसे अस्पताल के बजाय बाहर की दुकान से करीब 18 हजार रुपये में लेंस और दवाएं खरीदने के लिए कहा गया। वही सामान अस्पताल के HRF स्टोर पर 5 से 6 हजार रुपये में उपलब्ध था।
शिकायत के बाद केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने 4 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।
ये भी पढ़े-Lucknow में उज्बेकिस्तान की लोला गिरफ्तार, सर्जरी कराकर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप
सीनियर डॉक्टर पहले ही हो चुके निलंबित
जांच समिति ने करीब 30 मरीजों के रिकॉर्ड की पड़ताल की, जिनमें से 17 मरीजों ने बयान और खरीद के बिल/दस्तावेज प्रस्तुत कर आरोपों की पुष्टि की।
जांच के प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। डॉ. संजीव गुप्ता के प्राइवेट असिस्टेंट अब्बास पर मरीजों को निजी दुकानों तक भेजने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। ऑपरेशन थिएटर (OT) की व्यवस्थाओं और निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर ओटी सिस्टर इंचार्ज समेत कई कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
ये भी पढ़े- UP News: एक्सरे मशीन गिरने से मरीज की मौत, BJP विधायक के अस्पताल में इलाज कराने गए थे
बाहर से सामान मंगाने पर कार्रवाई
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा संस्थान में आने वाले मरीजों को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना हमारी पहली प्राथमिकता है। यदि कोई भी डॉक्टर या कर्मचारी मरीजों को बाहर से दवाएं या सर्जिकल उपकरण मंगाने के लिए मजबूर करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
ये भी पढ़े- बनारस के घाट जैसा हुआ Noida Airport, एंट्री से लेकर पार्किंग तक भरा लबालब पानी





