जाति से कोविड वैक्सीन तक… जनगणना-2027 के 40 सवालों में क्या-क्या पूछा जाएगा?

Census 2027: आजादी के बाद पहली बार सभी जातियों का डेटा जुटाया जाएगा, फॉर्म में पहचान, बैंकिंग और वैक्सीनेशन से जुड़े सवाल भी शामिल

Census 2027 Question List: भारत की आगामी जनगणना-2027 इस बार पहले के मुकाबले काफी अलग होने जा रही है। केंद्र सरकार ने जनसंख्या गणना के दूसरे चरण के लिए 40 सवालों वाली प्रश्नावली अधिसूचित कर दी है। इसमें जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार और पलायन जैसी सामान्य जानकारियों के साथ-साथ आधार, वोटर आईडी, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और कोविड-19 वैक्सीनेशन से जुड़े सवाल भी शामिल किए गए हैं।

सबसे बड़ा बदलाव जाति की जानकारी को लेकर है। आगामी जनगणना में पहली बार नियमित दशकीय जनगणना के तहत सभी लोगों से जाति की जानकारी दर्ज की जाएगी। सरकार ने जाति गणना को जनगणना-2027 का हिस्सा बनाने का फैसला अप्रैल 2025 में लिया था।

जाति और धर्म से जुड़े सवाल
40 सवालों वाली प्रश्नावली में व्यक्ति से पूछा जाएगा कि वह अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित है या नहीं और उसकी जाति क्या है। इसके साथ धर्म की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

रिपोर्टों के मुताबिक जाति के लिए जवाबदाता द्वारा बताई गई जाति को दर्ज करने की व्यवस्था है। यानी प्रश्नावली में जातियों की कोई बड़ी पूर्व-निर्धारित सूची चुनने के बजाय व्यक्ति अपनी जाति बताएगा।

कोविड वैक्सीन कहां लगवाई, यह भी बताना होगा
जनगणना के फॉर्म में एक सवाल कोविड-19 वैक्सीनेशन को लेकर भी है। लोगों से पूछा जाएगा कि उन्होंने कोविड का टीका कहां लगवाया था।

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोरोना महामारी के कारण 2021 की जनगणना निर्धारित समय पर नहीं हो सकी थी। अब अगली जनगणना में महामारी के बाद की स्थिति से जुड़ी यह जानकारी भी दर्ज होगी।

कितने बैंक अकाउंट हैं?
नई प्रश्नावली में लोगों से कुल बैंक खातों की संख्या भी पूछी जाएगी। इसके अलावा मोबाइल नंबर और कुछ पहचान दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी।

फॉर्म में आधार कार्ड, वोटर आईडी, भारतीय पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सवाल शामिल हैं। इसका उद्देश्य देश में पहचान दस्तावेजों और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच की स्थिति को समझने में मदद करना भी है।

शिक्षा और डिजिटल साक्षरता की भी जानकारी
जनगणना-2027 में सिर्फ यह नहीं पूछा जाएगा कि कोई व्यक्ति पढ़ा-लिखा है या नहीं। डिजिटल साक्षरता से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

लोगों से उनकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, शिक्षा के क्षेत्र और किसी शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं या नहीं, जैसी जानकारी ली जाएगी। इससे देश के शिक्षा और डिजिटल कौशल से जुड़े आंकड़ों की तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें…

JP Nadda की अचानक बिगड़ी तबीयत, दिल्ली AIIMS ने जारी किया हेल्थ अपडेट

रोजगार और काम का भी ब्योरा
प्रश्नावली में रोजगार से जुड़े कई सवाल भी हैं। व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, वह किस तरह का काम करता है, उसकी आर्थिक गतिविधि क्या है और वह किस उद्योग, व्यापार या सेवा से जुड़ा है—इस तरह की जानकारी दर्ज की जाएगी।

काम की प्रकृति और व्यक्ति की श्रमिक श्रेणी से संबंधित जानकारी भी जनगणना का हिस्सा होगी। इससे देश में रोजगार के स्वरूप का विस्तृत आंकड़ा तैयार करने में मदद मिल सकती है।

पलायन पर भी फोकस
जनगणना में माइग्रेशन यानी पलायन से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। लोगों से उनका जन्मस्थान, पिछला निवास स्थान, वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि और यहां आने का कारण पूछा जाएगा।

इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि लोग रोजगार, शिक्षा, शादी या अन्य कारणों से एक स्थान से दूसरे स्थान पर किस तरह जा रहे हैं।

महिलाओं से बच्चों से जुड़े सवाल
पात्र महिलाओं से बच्चों से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। इसमें अब तक जन्मे बच्चों की संख्या, वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों से संबंधित जानकारी शामिल है।

ये आंकड़े देश की प्रजनन दर और बदलती जनसंख्या संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

यह भी पढ़ें…

NALSAR विवाद में BCI के आदेश पर भड़के CJI, बोले- ‘ये मेरे और स्टूडेंट के बीच…’

कब शुरू होगी जनगणना?
जनगणना-2027 का जनसंख्या गणना चरण कुछ बर्फीले और गैर-समान समय-सारिणी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा। लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में यह चरण 30 सितंबर तक चलेगा।

इन क्षेत्रों में घर-घर गणना से पहले 17 से 31 अगस्त 2026 तक स्व-गणना यानी Self-Enumeration का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना बाद में होगी।

जनगणना का सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
जनगणना-2027 का सबसे बड़ा बदलाव जाति की व्यापक जानकारी का शामिल होना है। इसके साथ कोविड वैक्सीनेशन, बैंक खातों, डिजिटल साक्षरता और पहचान दस्तावेजों जैसे विषयों को शामिल किए जाने से इस बार का डेटा पहले से अधिक व्यापक होगा।

सरकार के लिए ये आंकड़े सामाजिक और आर्थिक नीतियां बनाने, संसाधनों के बेहतर वितरण और विभिन्न वर्गों की स्थिति समझने में उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, जाति संबंधी आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस जनगणना का विशेष महत्व माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें…

आजादी के इतिहास का वह दौर बेहद डरावना और दर्दनाक था

Back to top button