
NALSAR विवाद में BCI के आदेश पर भड़के CJI, बोले- ‘ये मेरे और स्टूडेंट के बीच…’
NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी में समारोह को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बयान पर सीजेआई सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी की है
Supreme Court Verdict: NALSAR विवाद देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने छात्रों के अधिकारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ विवाद की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा छात्रों के विरोध प्रदर्शन को अनुशासहीनता बताने और उन पर दंडात्मक रुख अपनाने पर सख्त नाराजगी जताते हुए जमकर फटकार लगाई।
समझिए क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश के शामिल होने के विरोध में एक कैंपेन चलाया था। छात्रों के इसी विरोध प्रदर्शन के बाद BCI ने मामले की जांच बिठा दी और छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की BCI को सख्त नसीहत
जस्टिस की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को विचारों की अभिव्यक्ति और संवाद का केंद्र होना चाहिए, न कि किसी तानाशाही व्यवस्था का। अदालत ने अपने फैसले में मुख्य बातें कहीं अनुशासन बनाए रखने और असहमति की आवाज को दबाने में बहुत फर्क है। छात्रों को अपनी समस्याओं के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने से नहीं रोका जा सकता।
BREAKING | Plea against BCI’s letters to NALSAR mentioned before Supreme Court
Sr. Adv. K Parameshwar: BCI has no business of what’s going on in a university.
CJI Kant: naturally this is absolutely uncalled for. It’s a dialogue between students and me. Who are they to raise… pic.twitter.com/n6ZX1y5S0V
— Bar and Bench (@barandbench) August 14, 2026
कोर्ट ने BCI को याद दिलाया कि उसका काम कानूनी शिक्षा के मानकों को बनाए रखना है, न कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की स्वतंत्रता का हनन करना या पुलिस जैसी भूमिका निभाना। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर किसी भी छात्र के करियर या बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन (Enrollment) को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
BCI ने कुछ घंटों के वापस लिया फरमान
BCI ने सभी राज्यों की बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि वे NALSAR यूनिवर्सिटी हैदराबाद से पास आउट होने वाले छात्रों का वकील के रूप में एनरोलमेंट न करें। हालांकि, भारी विरोध और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद BCI को महज कुछ घंटों के भीतर ही अपना यह आदेश वापस लेना पड़ा।





