हर घर में सैनिक बनने का सपना! बांदा के इन गांवों में सुबह से शुरू हो जाती है भर्ती की तैयारी

Independence Day Special: बांदा के यमुना किनारे बसे बेंदा और जौहरपुर गांवों में सेना भर्ती का जबरदस्त जुनून, सुबह होते ही मैदानों में दौड़ लगाते हैं युवा; शहीद सैनिकों की वीरगाथा बनी देशसेवा की प्रेरणा।

UP News: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में देशभक्ति और सैन्य सेवा की परंपरा आज भी लोगों के बीच मजबूत दिखाई देती है। बांदा जिले में यमुना नदी के किनारे बसे बेंदा और जौहरपुर गांव इसके उदाहरण हैं। फतेहपुर सीमा से सटे इन दोनों गांवों में बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का सपना देखते हैं। यहां सेना में जाना युवाओं की पहली पसंद में शामिल है।

करीब 15-15 हजार की आबादी वाले बेंदा और जौहरपुर गांवों में सुबह का नजारा कुछ अलग ही होता है। सूरज निकलने से पहले ही युवा दौड़ और शारीरिक अभ्यास के लिए मैदानों और सड़कों पर पहुंचने लगते हैं। सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवा दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और अन्य शारीरिक अभ्यास करते नजर आते हैं।

हर घर में सेना भर्ती की तैयारी का माहौल
ग्रामीणों के मुताबिक, इन गांवों में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो, जिसका कोई सदस्य सेना में जाने की तैयारी न करता हो या पहले सेना में सेवा न कर चुका हो। युवाओं में भारतीय सेना में शामिल होने को लेकर खासा उत्साह है।

हाल के दिनों में बेंदा, जौहरपुर और अमलीकौर के करीब आधा दर्जन युवा सेना में भर्ती हुए हैं। इन युवाओं के चयन से उनके परिवारों के साथ-साथ पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है।

सेना में भर्ती को यहां सिर्फ रोजगार के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे देश सेवा और परिवार के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि गांव के वरिष्ठ लोग भी युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

शहीदों की वीरगाथा से मिलती है प्रेरणा
इन गांवों के युवाओं के लिए देश सेवा की प्रेरणा सिर्फ वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं है। यहां के बलिदानी सैनिकों की कहानियां आज भी लोगों को देश के लिए समर्पण का संदेश देती हैं।

भारत-पाकिस्तान के 1947-48 के युद्ध में बेंदा गांव के सैनिक केदार सिंह ने 6 फरवरी 1948 को देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी वीरगाथा आज भी गांव के लोगों के बीच याद की जाती है।

वहीं 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में जौहरपुर के सैनिक सूरज पाल सिंह ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। गांव के युवा इन वीर सैनिकों को अपना आदर्श मानते हैं और उनकी शहादत से प्रेरणा लेकर सेना में शामिल होने का सपना देखते हैं।

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सुबह से शुरू हो जाती है युवाओं की मेहनत
सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शारीरिक फिटनेस सबसे महत्वपूर्ण है। सुबह होते ही गांव के मैदानों और सड़कों पर युवाओं की दौड़ शुरू हो जाती है। इसके बाद लंबी कूद, ऊंची कूद और अन्य अभ्यास किए जाते हैं।

कई युवा लंबे समय से सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना और अपने परिवार तथा गांव का नाम रोशन करना है।

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बुंदेलखंड की वीरता की परंपरा कायम
बुंदेलखंड को लंबे समय से वीरता और शौर्य की धरती के रूप में जाना जाता है। बांदा के बेंदा और जौहरपुर गांवों में सेना के प्रति युवाओं का आकर्षण इस परंपरा को आगे बढ़ाता दिखाई देता है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इन गांवों की कहानी बताती है कि देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं है। यहां के युवा सेना में भर्ती होने के लिए रोज पसीना बहा रहे हैं और शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।

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