भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने आर्थिक मोर्चे पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.1 अरब डॉलर के भारी उछाल के साथ 707 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो इस चालू वित्त वर्ष का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके अलावा सोने के भंडार में भी इजाफा देखा गया है। इस बड़ी उपलब्धि पर विदेश मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इसे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक साख का प्रतीक बताया है।
विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक मामलों से जुड़े आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल ‘इंडिया डिप्लोमेसी’ ने लिखा,‘‘रिकॉर्ड स्तर पर लगाई गई छलांग। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.1 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है, जो चालू वित्त वर्ष में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

वहीं दूसरी ओर न्यूयॉर्क,ऑस्ट्रेलिया और चिली में स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों ने भी इस डेटा को सोशल मीडिया मंचों पर साझा करते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड भंडार वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक नीतिगत विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और लाल सागर के संकट के बावजूद, भारत सरकार द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के लिए समय-समय पर उठाए गए कड़े कदमों ने भी वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संदेश दिया है।
कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विदेश मंत्रालय का यह सकारात्मक नजरिया बेहद महत्वपूर्ण है। भारत सरकार और आरबीआई द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों (जैसे एफसीएनआर-बी डिपॉजिट स्कीम) के कारण देश में 40 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी आई है। यह अभूतपूर्व 707 अरब डॉलर का ‘सुरक्षा कवच’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रुपये को स्थिरता देगा और वैश्विक मंदी या युद्ध जैसी विपरीत परिस्थितियों में भारत की कूटनीतिक सौदेबाजी की क्षमता को बढ़ाएगा।

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