UP News: मरीजों की जान से खिलवाड़! मेडिकल स्टोर बेच रहे नकली दवाएं…

Fake Medicine Scam: अधिक मुनाफा कमाने और कंपनियों से मिलने वाले भारी-भरकम कमीशन के चक्कर में कुछ मेडिकल स्टोर संचालक मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग और औषधि प्रशासन (Drug Department) द्वारा हाल ही में की गई छापेमारी और सैंपलिंग में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि बाजार में कई प्रसिद्ध कंपनियों के नाम पर नकली (Counterfeit) और अमानक (Substandard) दवाएं धड़ल्ले से बेची जा रही हैं।

कमीशन का खेल

जांच में सामने आया है कि मेडिकल स्टोर संचालकों को ब्रांडेड दवाओं पर तय मुनाफा (Margin) ही मिलता है, लेकिन स्थानीय या अनधिकृत रूप से बनने वाली नकली और अमानक दवाओं की बिक्री पर कंपनियों और बिचौलियों द्वारा 50% से लेकर 80% तक का भारी कमीशन ऑफर किया जाता है।

10 रुपये की लागत में तैयार होने वाली नकली एंटीबायोटिक, पेनकिलर या मल्टीविटामिन की गोलियों पर MRP 100 से 150 रुपये अंकित कर दी जाती है।डॉक्टर के पर्चे पर लिखी दवा से मिलती-जुलती पैकिंग (Look-alike Packaging) दिखाकर दुकानदार मरीजों को आसानी से यह नकली दवाएं थमा देते हैं।

सेहत पर गंभीर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन अमानक और नकली दवाओं में या तो सॉल्ट (Active Ingredient) की मात्रा बेहद कम होती है या फिर पूरी तरह से गायब होती है। मरीज समय पर दवा लेने के बावजूद ठीक नहीं होते। घटिया और हानिकारक केमिकल्स के इस्तेमाल से मरीजों के लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर जानलेवा असर पड़ने का खतरा बना रहता है।

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ड्रग विभाग का कड़ा एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए औषधि प्रशासन विभाग हरकत में आ गया है। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मेडिकल स्टोरों पर नकली या अमानक दवाएं पाई जाएंगी, उनके लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निरस्त (Cancel) किए जाएंगे।दोषियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

बिना बिल के कभी भी दवा न खरीदें, क्योंकि बिल ही आपकी खरीदी गई दवा का कानूनी सबूत होता है। दवा की शीशी या स्ट्रिप पर लिखे बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और क्यूआर/बारकोड को ध्यान से देखें। यदि दवा लेने के बाद भी असर न दिखे या उसकी गुणवत्ता पर संदेह हो, तो तुरंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।

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