Bengaluru के पार्क-झीलों पर संकट? तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक सरकार को घेरा

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या का आरोप- टनल रोड परियोजनाओं को आसान बनाने के लिए पार्क, झील और शहरी नियोजन से जुड़े कानूनों में बदलाव; जनता के विरोध के बाद सरकार ने समीक्षा का दिया आश्वासन।

Karnataka: बेंगलुरु में पार्कों, झीलों और शहरी विकास से जुड़े कानूनों में किए गए बदलाव को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार पर शहर के पर्यावरण और वैज्ञानिक शहरी नियोजन से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

मीडिया से बातचीत में तेजस्वी सूर्या ने कहा कि सरकार ने पार्क्स एक्ट, टैंक एक्ट और बीएमएलटीए एक्ट में बदलाव कर ऐसे प्रावधान किए हैं, जिनसे बेंगलुरु के पार्कों और झीलों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उनके मुताबिक इन संशोधनों का उद्देश्य प्रस्तावित शॉर्ट टनल और लॉन्ग टनल रोड परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आने वाली कानूनी अड़चनों को दूर करना है।

तीन महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव का आरोप
भाजपा सांसद ने कहा कि पार्क्स एक्ट शहर के पार्कों की सुरक्षा करता था, जबकि टैंक एक्ट झीलों और जलाशयों की रक्षा के लिए था। वहीं, बीएमएलटीए एक्ट का उद्देश्य वैज्ञानिक और समन्वित शहरी योजना सुनिश्चित करना था।

सूर्या ने आरोप लगाया कि इन कानूनों में बदलाव करके सरकार ने बेंगलुरु के पर्यावरणीय संसाधनों और व्यवस्थित शहरी विकास के लिए मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है।

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टनल रोड परियोजना को लेकर सरकार पर आरोप
तेजस्वी सूर्या के अनुसार, प्रस्तावित लंबी टनल रोड परियोजना के लिए सांकेय टैंक, लालबाग और कृष्णा राव पार्क से जुड़ी जमीन का अधिग्रहण आवश्यक था। उनका दावा है कि परियोजना को आगे बढ़ाने और कर्नाटक हाईकोर्ट में संभावित कानूनी चुनौतियों से बचने के लिए पार्क कानून में संशोधन किया गया।

उन्होंने कहा कि संशोधन के बाद पार्क की अधिकतम पांच प्रतिशत जमीन के उपयोग में बदलाव और बिक्री की अनुमति का रास्ता खुल गया है। भाजपा सांसद ने इसे पार्कों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर कदम बताया।

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जनता के विरोध के बाद समीक्षा का आश्वासन
सूर्या ने कहा कि इन बदलावों के खिलाफ जनता के भारी विरोध के बाद राज्य सरकार ने अब समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि समीक्षा का स्वरूप क्या होगा और क्या पुराने प्रावधानों को पूरी तरह बहाल किया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा इस पूरे मामले पर नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि पार्कों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को पहले की स्थिति में बहाल किया जाए।

इस मुद्दे ने बेंगलुरु में शहरी विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार की समीक्षा और टनल रोड परियोजनाओं को लेकर उसके फैसले पर राजनीतिक और पर्यावरणीय संगठनों की नजर रहेगी।

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