
सत्य निकेतन हादसे में रेखा सरकार का बड़ा एक्शन, MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड
सत्य निकेतन हादसा: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने और कई लोगों की दर्दनाक मौत के मामले में दिल्ली सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली नगर निगम के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इस बड़े प्रशासनिक एक्शन के बाद नगर निगम और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण और लापरवाही के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
गाज की जद में MCD के बड़े अधिकारी
निलंबित किए गए अधिकारियों में प्रशासनिक और इंजीनियरिंग विभाग के कई शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। विजिलेंस विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया है।
सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणबीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
अवैध निर्माण और लापरवाही पर उठी उंगलियां
सत्य निकेतन के रिहायशी और कमर्शियल इलाके में बनी यह इमारत करीब तीन दशक पुरानी बताई जा रही है, जो लड़कों के हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। अधिकारियों के अनुसार महज 55 वर्ग गज के छोटे से प्लॉट पर जहां केवल भूखंड और पहली मंजिल की अनुमति थी, वहां पांच मंजिलें खड़ी कर दी गई थीं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बेसमेंट में मरम्मत कार्य चल रहा था और हाल ही में हुई बारिश का पानी भरने से इमारत की नींव बेहद कमजोर हो गई थी। इस पूरे मामले में क्षेत्रीय निगम अधिकारियों की भूमिका और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
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दिल्ली एमसीडी के कमिश्नर ने क्या कहा था?
इससे पहले सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दिल्ली नगर निगम (MCD) के कमिश्नर संजीव खिरवार ने कहा था, “दुर्भाग्य से, सात लोगों की जान चली गई है। हमें लगता है कि गिरी हुई इमारत के बगल वाली इमारत कमजोर हो गई है, और रात भर उसे मजबूत करने का काम किया गया। अगले 1-2 दिनों में हम उसे योजनाबद्ध तरीके से गिराने का काम करेंगे।
खिरवार ने कहा कि इमारत के मालिक से जुड़े दस्तावेज प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड से मिले है। मालिक ने पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स भरा था और 2007 में कन्वर्जन चार्ज भी दिया था। पुलिस मालिक का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
यह इमारत 1970 के दशक में बनी थी। खिरवार ने कहा, 1970 के दशक की इस इमारत को कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही इसे सील किया गया। इस इमारत के बारे में कोई शिकायत भी नहीं मिली थी।





