
‘क्यों न आपको एक्ट के दायरे में लाया जाए…?’ सुप्रीम कोर्ट ने BCCI से पूछा सवाल
Supreme Court on BCCI: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और सभी राज्य क्रिकेट संघों के प्रशासनिक ढांचे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा सवाल उठाया है। शीर्ष अदालत ने BCCIऔर राज्य संघों से स्पष्टीकरण मांगा है कि उन्हें ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025’ (National Sports Governance Act, 2025) के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बीसीसीआई मामले से जुड़ी विभिन्न अर्जियों पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक टिप्पणी की।
क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट 2014 से BCCI से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है और इस मामले में समय-समय पर कई अर्जियां दाखिल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीजेआई जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी, जो सुधार के उपाय सुझाए जा सकें। इसमें क्रिकेट संस्था के लिए संविधान बनाना भी शामिल था।
बीसीसीआई के ढांचे, संगठन और कामकाज में सुधार की बात वाली सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने जिन अहम मुद्दों पर ध्यान दिया, उनमें से एक था पदाधिकारियों का कार्यकाल। सितंबर 2022 में, कोर्ट ने BCCI के संविधान में बदलावों को मंजूरी दी। इन बदलावों के तहत, कोई पदाधिकारी लगातार 12 साल तक पद पर रह सकता था। जिसमें छह साल राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में और छह साल BCCI में बिताए जा सकते थे। इसके बाद उन्हें तीन साल के ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ (अनिवार्य ब्रेक) से गुजरना होता था।
कोर्ट ने पदाधिकारियों को राज्य एसोसिएशन और BCCI, दोनों ही जगहों पर लगातार दो कार्यकाल तक एक ही पद पर बने रहने की भी अनुमति दी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट से मंजूर BCCI संविधान के तहत, उन लोगों के लिए तीन साल का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य था जिन्होंने राज्य क्रिकेट एसोसिएशन या BCCI में लगातार तीन-तीन साल के दो कार्यकाल पूरे कर लिए थे।
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