
सेंसर बोर्ड में बड़ा बदलाव, पंकज त्रिपाठी समेत 18 सदस्यों की नई टीम का ऐलान
New CBFC Board Members: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का पुनर्गठन करते हुए तत्काल प्रभाव से 18 सदस्यीय नए बोर्ड का गठन किया है। इस नए पैनल में बॉलीवुड, क्षेत्रीय सिनेमा, संगीत, रंगमंच और साहित्य जगत की कई बड़ी हस्तियों को शामिल किया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नवगठित बोर्ड में अभिनेत्री प्रीति जिंटा, अभिनेता सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, मनोज जोशी, प्रसेनजीत चटर्जी, पल्लवी जोशी और टीवी अभिनेत्री रूपाली गांगुली को तीन साल के कार्यकाल के लिए बोर्ड सदस्य नियुक्त किया गया है।
18 सदस्यों की नई टीम का ऐलान
नया 18 सदस्यीय बोर्ड सीबीएफसी चेयरमैन शशि शेखर वेम्पति की अध्यक्षता में काम करेगा। इस नए बोर्ड का गठन सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 और सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) रूल्स 2024 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस पैनल में दिग्गज निर्देशकों, संगीतकारों और विचारकों का संगम देखने को मिल रहा है।
बोर्ड में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन, तीन बार के ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज, गायक व पूर्व सांसद हंसराज हंस, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम, निर्देशक अभिषेक जैन, नीला माधब पांडा और लेखक यतींद्र मिश्र जैसे जाने-माने नामों को जगह मिली है।
दो पुराने सदस्यों को बरकरार
उल्लेखनीय है कि सेंसर बोर्ड का पिछला पुनर्गठन अगस्त 2017 में किया गया था। नियमानुसार बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है, लेकिन नए उत्तराधिकारियों की नियुक्ति न होने के कारण पिछला पैनल अपनी समय सीमा के बाद भी कार्य करता रहा।
नए बोर्ड में पिछले पैनल से केवल दो सदस्यों- रंगमंच निर्देशक वामन केंद्रे और लेखक रमेश पतंगे को बरकरार रखा गया है। वहीं पुराने बोर्ड से अभिनेत्री विद्या बालन, निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, गौतमी तड़िमल्ला और वाणी त्रिपाठी टीकू जैसे सदस्यों का कार्यकाल अब समाप्त हो गया है।
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सिनेमा में विविधता लाने की कोशिश
सेंसर बोर्ड के इस नए पैनल के गठन से भारतीय फिल्मों के प्रमाणीकरण और वर्गीकरण में व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण मिलने की उम्मीद है। मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा के अलावा बंगाली, तेलुगु, गुजराती और दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने से बोर्ड में सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता बढ़ेगी।
नवनियुक्त सदस्य आने वाले तीन वर्षों तक देश में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की समीक्षा, आयु-आधारित रेटिंग्स और प्रमाणन संबंधी महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
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