Stock Market: खुलते ही क्रैश हुआ शेयर बाजार, ताश के पत्तों की तरह बिखरे ये स्टॉक

Stock Market Crash: ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल के कारण आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद सुस्त रही। गुरुवार को बाजार खुलते ही भारी  बिकवाली देखने को मिला, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 660 से ज्यादा अंक टूटकर 73,048 के स्तर पर आ गया।

वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 252 अंकों की गिरावट के साथ 22,559 के आसपास ट्रेड करता नजर आया। बाजार में आए इस भूचाल के बीच मारुति, टाटा स्टील, पावर ग्रिड और बीईएल जैसे बड़े शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे हुए नजर आए।

इन शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट

आज सुबह के कारोबार में लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में ट्रेड करते दिखे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर में करीब 0.98% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी फार्मा में भी करीब 0.78% की गिरावट आई।  इसके अलावा एफएमसीजी (FMCG), रियलिटी, सीमेंट और बैंकिंग-फाइनेंशियल शेयरों में भी भारी सुस्ती और बिकवाली का माहौल देखने को मिल रहा है।

एशियाई बाजारों में कोहराम

भारतीय बाजार के खुलने से पहले ही एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला। जापान का निक्केई (Nikkei) इंडेक्स भारी भरकम गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी लाल निशान में गहरे गोता लगाते दिखे। इसके अलावा गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) ने भी पहले ही बाजार के भारी गिरावट के साथ खुलने के साफ संकेत दे दिए थे।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

घरेलू शेयर बाजार पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की तरफ से लगातार हो रही ताबड़तोड़ बिकवाली का बहुत बड़ा दबाव बना हुआ है। अक्टूबर महीने में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से हजारों करोड़ रुपये निकाले हैं, जिससे बड़े और मिडकैप शेयरों के सेंटीमेंट पर लगातार नकारात्मक असर पड़ रहा है।

बीते सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद ऊंचे स्तरों पर निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली (Profit Booking) को प्राथमिकता दी। तकनीकी मोर्चे पर अहम सपोर्ट स्तरों के टूटने के बाद बिकवाली का दायरा और अधिक चौड़ा हो गया, जिससे बैंकिंग, ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

कच्चे तेल की कीमतें

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण देश में आयातित महंगाई, राजकोषीय घाटे और कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर निवेशकों की चिंताएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

फिलहाल बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का यही मानना है कि निवेशकों को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी तरह की पोजीशन लेने से पहले ग्लोबल वोलटिलिटी और मजबूत फंडामेंटल्स पर पूरा ध्यान देना चाहिए।

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