PM Modi: भाषण में दिखा जोश, लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने दिखाया नए भारत का विज़न

PM Modi Independence Day Speech: पीएम मोदी ने आज देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से अपना पहला भाषण दिया. इस दौरान वे करीब 65 मिनट तक बोले. इस बार वे 86 मिनट बोले और पंडित नेहरू के 72 मिनट के भाषण का रिकॉर्ड तोड़ दिया.

लाल किले से सबसे ज्यादा बार भाषण देने वाले प्रधानमंत्रियों की लिस्ट में नरेंद्र मोदी तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस मामले में शीर्ष पर हैं, उन्होंने 17 बार लाल किले स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया. इंदिरा गांधी दूसरे नंबर पर हैं. श्रीमति गांधी ने 16 बार लाल किले से भाषण दिया है.

साल 2016 में नरेंद्र मोदी करीब 94 मिनट तक बोले. उस वक्त मॉब लीचिंग का मामला पूरे देश में गर्म था और प्रधानमंत्री ने लाल किले से इसको लेकर संदेश दिया. उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र जाति और धर्म जैसे कारणों से विभाजित है, वह महान उपलब्धियां हासिल नहीं कर सकता.

2017 में प्रधानमंत्री ने सबसे कम 56 मिनट का भाषण लाल किले से दिया. प्रधानमंत्री के इस भाषण की विपक्ष ने आलोचना की और कहा कि नोटबंदी जैसे फ्लॉप जैसे मुद्दों की वजह से प्रधानमंत्री ज्यादा कुछ नहीं बोल पाए. 2018 में प्रधानमंत्री करीब 82 मिनट तक बोले.

किन मुद्दों पर रहा फोकस?

प्रधानमंत्री ने 2024 में सिविल कोड का जिक्र लाल किले के प्राचीर से किया. उन्होंने कहा कि देश में सेक्युलर कोड की जरूरत है. अभी सिर्फ कम्युनल कोड चल रहा है. उन्होंने अपने भाषण में विज्ञान और मेडिकल पर विशेष फोकस रखा.

भारतीय न्याय संहिता का भी प्रधानमंत्री ने जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन में सरकार का दखल कम हो, इस दिशा में भी हमने काम किया है. हमने देशवासियों के लिए 1,500 से ज्यादा कानूनों को खत्म कर दिया, ताकि कानूनों के जंजाल में देशवासियों को फंसना न पड़े.

आज के भाषण में खास रही ये बातें

पीएम ने कहा कि अगले 5 साल में मेडिकल लाइन में 75,000 नई सीटें बनाए जाने का ऐलान किया. साथ ही इस बीच उन्‍होंने UCC का मुद्दा भी उठाया. पीएम ने कहा कि जिस सिविल कोड को लेकर हम जी रहे हैं, वह सचमुच में एक प्रकार का कम्युनल सिविल कोड है. भेदभाव करने वाला सिविल कोड है. इसलिए अब देश में एक सेकुलर सिविल कोड होना चाहिए. देश को अब यूसीसी की जरूरत है. इस पर व्‍यापक चर्चा होनी चाहिए. 

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