
वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप, प्रशासन ने लोगों को किया सचेत
Ganga Water Level Alert : वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। राजघाट स्थित केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, जलस्तर 68.74 मीटर तक पहुंच गया है और यह 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से बढ़ रहा है। प्रशासन अलर्ट पर है।
Ganga Water Level Alert : उत्तर भारत में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। धार्मिक नगरी काशी में मां गंगा उफान पर हैं, जिसके चलते वाराणसी के प्रसिद्ध 84 घाटों में पानी भर गया है। कई घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, और घाटों के किनारे बने मंदिरों में भी पानी घुस गया है।खास तौर पर अस्सी घाट, जो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है, पूरी तरह डूब चुका है। यहां हर सुबह होने वाला ‘सुबहे बनारस’ का मंच भी गंगा की लहरों में समा गया है।
गहरे पानी में न जाने की चेतावनी
स्थानीय प्रशासन ने गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को गहरे पानी में न जाने की चेतावनी दी है। घाटों पर लगातार मुनादी की जा रही है और छोटी-बड़ी सभी नौकाओं के संचालन पर रोक लगा दी गई है। गंगा का जलस्तर वर्तमान में 68.94 मीटर पर पहुंच चुका है, जो चेतावनी निशान 70.262 मीटर के करीब है।
खतरे के निशान से ऊपर गंगा का जलस्तर
खतरे का निशान 71.262 मीटर है, और जलस्तर 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। यदि यह गति बरकरार रही, तो आने वाले दिनों में निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन हुआ सतर्क, घाटों पर निगरानी तेज
- घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाएं
- नाव संचालन को नियंत्रित करें
- जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी करें
- नाविकों और श्रद्धालुओं को सतर्क करें
नगर आयुक्त ने कहा कि “गंगा के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। घाटों पर पेट्रोलिंग टीमें तैनात की गई हैं। कोई भी नाविक या श्रद्धालु जलस्तर बढ़ने की स्थिति में घाटों के समीप जाने से पहले अनुमति ले।”
गंगा आरती की संख्या घटी
स्थानीय निवासी राकेश पांडेय के मुताबिक, “पानी में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन फिलहाल स्थिर है. कोई नहीं बता सकता कि पानी बढ़ेगा या घटेगा. पर्यटकों का आना-जाना कम हो गया है. लोग घाटों पर नहीं आ रहे, बस दूर से नजारा देखकर चले जा रहे हैं.” उन्होंने यह भी बताया कि गंगा आरती की संख्या भी कम हो रही है. पहले 6 आरती होती थीं, फिर 3, और अब 1 या 2 ही हो रही हैं.





