हरियाली अमावस्या पर करें ये उपाय, मिलेगा पितरों का आशीष और भगवान शिव का वरदान

Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। इसी के साथ ही सूर्य देव कर्क राशि में रहेंगे और चंद्रमा 10 बजकर 59 मिनट तक मिथुन राशि में रहेंगे। इसके बाद चंद्रमा कर्क राशि में गोचर करेंगे।

इस शुभ अवसर पर भक्त जन गंगा-स्नान कर देवों के देव महादेव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा करते हैं। वहीं, साधक अपने पितरों का तर्पण एवं पिंडदान भी करते हैं।

हरियाली अमावस्या
दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त 12 बजे से शुरू होकर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। राहुकाल का समय 02 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर 3 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

हरियाली अमावस्या तिथि

हरियाली अमावस्या का प्रारंभ- 24 जुलाई को देर रात 02:28 मिनट से

अमावस्या का समापन- 25 जुलाई को देर रात 12:40 मिनट पर होगा

हरियाली अमावस्या पर महांसंयोग
इस बार 24 जुलाई 2025 को हरियाली अमावस्या पर गुरु पुष्य योग शाम 4.43 मिनट से अगले दिन सुबह 5.39 तक रहेगा. इसके साथ सर्वार्थ सिद्धि, और अमृत सिद्धि योग रहेंगे. शास्त्रों में इस अमावस्या पर पूजा-पाठ, स्नान-दान करना उत्तम माना गया है. साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी हरियाली अमावस्या का बहुत महत्व है.

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पितरों को समर्पित होती है हरियाली अमावस्या
इस दिन कई लोग पूजा-पाठ के साथ ही पेड़-पौधे भी लगाते हैं। हरियाली अमावस्या पितरों को समर्पित होती है, इसलिए इस दिन पितरों के नाम पर दान और तर्पण करने का भी महत्व है। अमावस्या के दिन विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए झूले की पूजा भी करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में मधुरता और संतान सुख प्राप्ति होती है।

जीवन में आती है सकारात्मक ऊर्जा
इस दिन पितरों के तर्पण के लिए आप सुबह जल्दी उठकर गंगाजल से स्नान करें, यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है। स्नान के बाद ध्यान लगाना और अपने ईष्ट का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद शिवजी का विशेष पूजन करें। भगवान शिव को आक, मदार जैसे फूल चढ़ाना बहुत लाभकारी माना जाता है। साथ ही पीपल के पेड़ की पूजा करें। इसकी पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

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हरियाली अमावस्य पर करें ये उपाय
* इस दिन गुरु पुष्य नक्षत्र के संयोग में पीपल, केला, तुलसी, आंवला, बेलपत्र, बड़ आदि का पेड़ लगाएं और उनके संरक्षण का संकल्प लें. साथ ही इन पेड़ों की पूजा करें. मान्यता है इससे मां लक्ष्मी और शंकर भगवान प्रसन्न होते हैं.

* गुरु पुष्य योग में गरीबों को अन्न, वस्त्र, और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति आती है.

* इस दिन किसी नदी किनारे श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करें. साथ ही गाय को चारा भी खिलाएं. पितृ दोष दूर होता है.

* हरियाली अमावस्या की रात कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से धन, समृद्धि, और सौभाग्य में वृद्धि होती है, ऐसी मान्यता है.

* हरियाली अमावस्या और पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग में मछलियों के लिए नदी में आटे की गोलियां डालें. नदी में काले तिल प्रवाहित करें. इससे रोग, दोष, दरिद्रता दूर होते हैं

* अगर धन कहीं अटका हुआ है तो गुरु पुष्य योग में घर के बाहर स्वास्तिक बनाएं और पास के मंदिर में जाकर दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करें. इससे अटके हुए धन की प्राप्ति के रास्ते सुलभ होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

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