US Iran जंग का नया मोर्चा! मिस्र के पोर्ट पर ड्रोन हमला, वैश्विक शिपिंग पर बढ़ा खतरा…

US Iran War Air Strike: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव अब मध्य पूर्व से निकलकर उत्तरी अफ्रीका तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। मिस्र के प्रमुख समुद्री बंदरगाह दमियाता (Damietta Port) पर हुए ड्रोन हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। मिस्र सरकार ने गुरुवार को पुष्टि की कि बुधवार को बंदरगाह पर दो गैस टैंकरों में लगी आग कोई तकनीकी हादसा नहीं, बल्कि ड्रोन हमले का परिणाम थी।

रिपोर्टों के अनुसार, ड्रोन ने अमेरिकी कंपनी के प्राकृतिक गैस भंडारण जहाज Energos Winter को निशाना बनाया। विस्फोट के बाद लगी आग पास में खड़े दूसरे गैस टैंकर GasLog Salem तक फैल गई। हालांकि बंदरगाह पर मौजूद दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

ईरान पर लगे गंभीर आरोप
मिस्र सरकार ने इस हमले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस हमले के पीछे ईरान समर्थित तत्वों का हाथ हो सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि हमले का उद्देश्य यह संदेश देना था कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ा, तो वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी इसकी चपेट में आ सकती है।

हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है।

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वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बढ़ी चिंता
दमियाता पोर्ट मिस्र के प्रमुख एलएनजी (LNG) निर्यात केंद्रों में शामिल है। यहां से यूरोप और अन्य देशों को बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में इस बंदरगाह पर हुआ हमला केवल मिस्र की सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो गैस और तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल आ सकता है। साथ ही भूमध्य सागर और लाल सागर के समुद्री मार्गों पर भी सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।

जंग का बढ़ता दायरा
अब तक ईरान-अमेरिका तनाव मुख्य रूप से फारस की खाड़ी, इराक, सीरिया और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित माना जा रहा था। लेकिन मिस्र जैसे रणनीतिक देश में इस तरह की घटना ने संकेत दिया है कि यदि संघर्ष नहीं थमा, तो इसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
हमले के बाद कई देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और ऊर्जा कंपनियों ने भी अपने जहाजों और बंदरगाह संचालन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।

फिलहाल मिस्र की सुरक्षा एजेंसियां हमले की जांच में जुटी हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या यह घटना ईरान-अमेरिका संघर्ष को और व्यापक रूप देगी या फिर कूटनीतिक प्रयासों से तनाव को नियंत्रित किया जा सकेगा।

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