
झुक गया फलता का ‘पुष्पा’! री-पोलिंग से पहले TMC उम्मीदवार का यू-टर्न…
West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया, जब फलता विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार Jahangir Khan ने चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग करने का ऐलान कर दिया। 21 मई को होने वाली री-पोलिंग से ठीक पहले लिया गया यह फैसला राज्य की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। इसे टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
री-पोलिंग से पहले बदला सियासी समीकरण
फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग ने ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद री-पोलिंग कराने का फैसला लिया था। मतदान से पहले ही इलाके का राजनीतिक माहौल गरमा गया था। इसी बीच जहांगीर खान ने अचानक चुनावी प्रक्रिया से हटने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया।
जहांगीर खान ने कहा कि वह अब चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहना चाहते। हालांकि उन्होंने अपने फैसले के पीछे विस्तार से कोई सार्वजनिक कारण नहीं बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे बढ़ते विवाद और दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन हैं ‘फलता के पुष्पा’?
जहांगीर खान को इलाके में ‘फलता का पुष्पा’ कहा जाता है। उनकी दबंग छवि और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण समर्थकों के बीच यह नाम काफी लोकप्रिय रहा है। टीएमसी ने उन्हें क्षेत्र में मजबूत मुस्लिम चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया था।
लेकिन उनकी उम्मीदवारी शुरू से ही विवादों में रही। विपक्षी दलों ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए और चुनाव प्रचार के दौरान लगातार निशाना साधा। सोशल मीडिया पर भी जहांगीर खान को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं।
TMC के लिए क्यों बड़ा झटका?
21 मई की री-पोलिंग से ठीक पहले जहांगीर खान का पीछे हटना टीएमसी की रणनीति पर असर डाल सकता है। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया, जब चुनाव प्रचार अपने अंतिम दौर में था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से विपक्ष को नया मुद्दा मिल सकता है। वहीं टीएमसी के लिए क्षेत्र में संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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चुनाव आयोग के फैसले के बाद बढ़ा था विवाद
फलता सीट पर मतदान के दौरान ईवीएम गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद Election Commission of India ने मामले का संज्ञान लेते हुए री-पोलिंग का आदेश दिया था।
री-पोलिंग की घोषणा के बाद से ही इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज थी। इसी बीच जहांगीर खान का चुनावी मैदान छोड़ना पूरे मामले को और ज्यादा चर्चित बना गया है।
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अब आगे क्या?
जहांगीर खान के फैसले के बाद फलता विधानसभा सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि टीएमसी इस स्थिति से कैसे निपटेगी और विपक्ष इस मौके का कितना राजनीतिक फायदा उठाएगा।
राज्य की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव और चुनावी मुकाबले लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
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