अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर विपक्ष को तगड़ा झटका…उप-सभापति ने ख़ारिज की नोटिस

No-Confidence Motion: संसद के शीतकालीन सत्र में लगातार हंगामा जारी है। इस बीच, विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। राज्‍यसभा के सभापति और उपराष्‍ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्षी दलों के अविश्‍वास प्रस्‍ताव का नोटिस उप-सभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया है। उपसभापति ने इसपर कड़ी टिप्‍पणी भी की है.

सभापति पर सत्ता पक्ष का साथ देने और विपक्ष की आवाज को दबाने का आरोप लगा है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के 70 से अधिक सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पर साइन किया था। संसद के सचिवालय के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को 14 दिन पहले दिया जाना चाहिए। लेकिन विपक्ष ने नियमों का पालन नहीं किया इसलिए उसे रिजेक्ट कर दिया गया है।

सभापति धनखड़ पर बड़ा आरोप
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बीते 10 दिसंबर को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया था। कांग्रेस मुख्य प्रस्तावक थी। ममता बनर्जी की टीएमसी, केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी, डीएमके, लालू प्रसाद यादव का राष्ट्रीय जनता दल सहित विभिन्न पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे। सभापति जगदीप धनखड़ पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने बड़ा कदम उठाया था। शीतकालीन सत्र के पहले मानसून सत्र में भी विपक्ष ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का मन बनाया था लेकिन बाद में इसे टाल दिया था।

क्‍या बोले उपसभापति?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सभापति को हटाने के विपक्ष के महाभियोग नोटिस को खारिज कर दिया है। उपसभापति ने अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कि इस व्यक्तिगत रूप से लक्षित नोटिस की गंभीरता तथ्यों से रहित है और इसका उद्देश्य प्रचार हासिल करना है. उन्होंने यह भी माना कि यह नोटिस सबसे बड़े लोकतंत्र के उपराष्ट्रपति के उच्च संवैधानिक पद को जानबूझकर अपमानित करने का एक दुस्साहस था. सभापति धनखड़ की ओर से खुद को इससे अलग करने के बाद उपसभापति को नोटिस से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

14 दिन पूर्व नोटिस देना अनिवार्य
इस दौरान उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने 2020 के तत्कालीन सभापति वेंकैया नायडू का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “वेंकैया नायडू ने अनुच्छेद 67 (बी) के प्रावधानों के तहत प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने पर पसभापति के समान निष्कासन नोटिस को खारिज कर दिया था. उपसभापति ने कहा, संविधान के प्रावधानों, राज्यसभा के नियमों और पिछली कार्रवाईयों को पढ़ने के बाद मैंने पाया कि यह अविश्वास प्रस्ताव सही प्रारूप में नहीं है. इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 90 (सी) के प्रावधानों के अनुसार, किसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए 14 दिनों की नोटिस अवधि की आवश्यकता होती है.

यह भी पढ़ें…

आंबेडकर मुद्दे पर अखाड़ा बना संसद, धक्कामुक्की में बीजेपी के दो सांसद जख्मी…

आंबेडकर मामले पर गरमाई सियासत, संसद के बाहर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

कांग्रेस पर हमलावर हुए पीएम मोदी…कहा कांग्रेस के कुकर्मों से जनता परिचित है

Back to top button