
बुद्ध के विचारों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश, ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का हुआ समापन…
Lucknow News: राजधानी लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में आयोजित 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का मंगलवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग और डिवाइन ग्लोरी पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
समापन समारोह में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और संस्थान के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
बुद्ध के विचारों को अपनाने का संदेश
मुख्य अतिथि डॉ. राकेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का उद्देश्य केवल भगवान बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों की जानकारी देना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों, करुणा, अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रकृति संरक्षण और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। ऐसे आयोजन युवाओं को समाज और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘बुद्ध का जीवन प्रकृति से गहरे जुड़ाव का प्रतीक’
विशिष्ट अतिथि तरुणेश बौद्ध ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध का संपूर्ण जीवन प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति, प्रथम उपदेश और महापरिनिर्वाण—चारों प्रमुख घटनाएं प्रकृति की गोद में हुईं, जो यह दर्शाती हैं कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल पौधारोपण तक सीमित न रहें, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और जल, वन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहें।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
समापन समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने भगवान बुद्ध के जीवन, करुणा, अहिंसा और सह-अस्तित्व पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने नाटक, गीत, समूह गान और भाषण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। इन प्रस्तुतियों की अतिथियों और उपस्थित लोगों ने सराहना की।
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प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
कार्यशाला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने बताया कि दस दिनों तक चली इस कार्यशाला में बच्चों को बौद्ध दर्शन, ध्यान, योग, नैतिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
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पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में सकारात्मक सोच, नैतिक चेतना और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का समापन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक संदेशों और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ, जहां भगवान बुद्ध के विचारों को वर्तमान समय की चुनौतियों से जोड़ते हुए जीवन में अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
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