ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों को देखना है तो जाइए सिक्किम

Sikkim Tourism

गंगटोक। भारत के पूर्वोत्तर में स्थित सिक्किम राज्य ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां संपूर्ण बौद्ध धर्म, कला, संस्कृति तथा सभ्यता को संभालकर रखा गया है। सिक्किम में स्थित सभी मठ ऐतिहासिक और प्राचीन महत्व के हैं। सवा चार लाख की आबादी वाले राज्य में 70 से ज्यादा बौद्ध मठ हैं।

पेमयांग्तसे, ताशिदिंग, रूमटेक, फोडांग, दॉ−दरूल, ऐन्वे, रालांग तथा फेन्सांग जैसे मठ ज्यादा लोकप्रिय हैं जिनमें कि विभिन्न देवताओं तथा मूर्तियों व चित्रकारी के दर्शन होते हैं।

नमिंग्म्पा संप्रदाय से संबद्ध पेमयांग्से मठ प्रमुख होने के साथ ही सर्वाधिक लोकप्रिय मठ भी है। साढ़े तीन सौ वर्ष पुराना यह मठ लगभग छह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

राजधानी गंगटोक से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रूमटेक मठ आराधना स्थल होने के साथ ही बौद्ध धर्म शिक्षा का प्रमुख केन्द्र भी है। यहां की परंपरागत शैली में बना यह विशाल मठ कारग्यद संप्रदाय से संबद्ध है।

आवासीय घरों के बीच बना यह रूमटेक मठ दूर से नेकलेस में चमचमाते मोतियों-सा आभास देता है। यहां आने पर आपको लामाओं की तीन पीढ़ियां बाल, युवा और बुजुर्ग को एक साथ देखने और मिलने का अवसर प्राप्त होगा।

यहां दो मठ ‘दा−दारूल’, और ‘ऐन्चे मठ’ तो विशेष रूप से दर्शनीय हैं। 45 साल पुराना यह मठ अपनी दिलकश वास्तुकला के कारण आपके दिल को तो मोहता ही है साथ ही सफेद रंग का यह मठ आकाश से बातें करता हुआ भी दिखाई देता है।

त्यौहारों के दिनों में खासकर, अक्टूबर से दिसम्बर तक के महीनों में इन मठों में सैलानियों और श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा सकती है।

इन दिनों में ताशिदिंग, रूमटेक और ऐन्वे मठों में लामा लोग बाघ, शेर और अन्य जंगली जानवरों के मुखौटे लगा कर और खास प्रकार की पोशाकें पहन कर नृत्य करते हैं।

आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में भी सिक्किम ने अपनी पुरातन पहचान को कायम रखा है। आज जिस प्रकार हर राज्य अपने कायाकल्प करने के चक्कर में पुरातन महत्व की चीजों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है, इस संदर्भ में सिक्किम को अपवाद कहा जा सकता है।

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