BJP की चुनावी हैट्रिक पर गुटबाजी का ग्रहण! नोएडा में बढ़ी अंदरूनी कलह…

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने गौतमबुद्ध नगर में संगठनात्मक एकजुटता बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। जिले में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है, जिससे पार्टी की चुनावी रणनीति और हैट्रिक के लक्ष्य पर सवाल उठने लगे हैं।

हाल ही में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यात्री विमान सेवा की शुरुआत के दौरान सामने आई नाराजगी अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब 3 अगस्त को दादरी में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर फिर से असंतोष बढ़ गया है। यह कार्यक्रम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का जनता के बीच पहला बड़ा सार्वजनिक आयोजन माना जा रहा है, लेकिन इसमें जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों को आमंत्रित नहीं किए जाने की चर्चा तेज हो गई है।

प्रमुख नेताओं को नहीं मिला निमंत्रण
सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम से गौतमबुद्ध नगर के सांसद, विधायक, एमएलसी और भाजपा जिलाध्यक्ष को दूर रखा गया है। आयोजन को किसी विशेष समाज का कार्यक्रम बताकर इसका कारण बताया जा रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा रहा। कार्यकर्ताओं और नेताओं का मानना है कि यदि यह जनता का कार्यक्रम है तो सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी स्वाभाविक होनी चाहिए।

पुरानी गुटबाजी फिर बनी चर्चा का विषय
गौतमबुद्ध नगर भाजपा में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से संगठन के भीतर अलग-अलग धड़े सक्रिय रहे हैं। हालांकि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर इस आंतरिक मतभेद का असर चुनावी नतीजों पर नहीं पड़ने दिया। लेकिन समय के साथ मतभेद कम होने के बजाय और गहरे होते नजर आ रहे हैं।

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एयरपोर्ट कार्यक्रम में भी दिखी थी दूरी
15 जून को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यात्री विमान सेवा के शुभारंभ के अवसर पर भी कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी थी। उस कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, सांसद डॉ. महेश शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, दादरी विधायक तेजपाल नागर, एमएलसी नरेंद्र भाटी, श्रीचंद शर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी जैसे नेताओं को प्रमुख भूमिका नहीं मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद से पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बना हुआ है।

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2027 चुनाव से पहले बढ़ सकती है चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन रहा है। यदि स्थानीय स्तर पर गुटबाजी इसी तरह बनी रही तो विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। हालांकि भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व समय रहते इन मतभेदों को दूर करने का प्रयास कर सकता है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव में संगठन पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतर सके।

फिलहाल दादरी का प्रस्तावित कार्यक्रम केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भी तय करेगा कि गौतमबुद्ध नगर भाजपा में संगठनात्मक एकजुटता कितनी मजबूत है और पार्टी अपने अंदरूनी मतभेदों को किस तरह संभाल पाती है।

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