
2022 जैसी बगावत का डर! उद्धव गुट ने सांसदों पर कसा अनुशासन का शिकंजा…
Shivsena (UBT) Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में संभावित बगावत की अटकलों के बीच पार्टी ने सांसदों की आपात बैठक बुलाई, लेकिन इस बैठक में अपेक्षित संख्या में सांसद नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद ही बैठक में शामिल हुए, जिसके बाद नेतृत्व की चिंता और बढ़ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत की मौजूदगी में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य सांसदों की एकजुटता दिखाना और बगावत की खबरों पर विराम लगाना था। हालांकि, अधिकांश सांसदों की गैरहाजिरी ने उल्टा राजनीतिक संदेश दे दिया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने अनुपस्थित रहे 6 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
शिंदे गुट में जाने की चर्चाओं ने बढ़ाई बेचैनी
पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद मुख्यमंत्री पद छोड़कर अब डिप्टी सीएम बने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के संपर्क में हैं। दावा किया जा रहा है कि बागी गुट को पार्टी के छह सांसदों का समर्थन हासिल है और उन्होंने अपनी राजनीतिक रणनीति को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी संपर्क साधा है।
इन दावों ने उद्धव ठाकरे खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी को आशंका है कि 2022 में विधानसभा में हुई बड़ी टूट की तरह अब लोकसभा स्तर पर भी झटका लग सकता है। इसी खतरे को देखते हुए सभी सांसदों को दिल्ली बुलाकर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था और ‘थ्री-लाइन व्हिप’ भी जारी किया गया था।
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बैठक से दूरी ने बढ़ाए सवाल
बैठक में बड़ी संख्या में सांसदों की गैरमौजूदगी को राजनीतिक हलकों में गंभीर संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट सांसद वास्तव में शिंदे गुट के साथ जाने का फैसला करते हैं, तो इससे उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है।
हालांकि, अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। दूसरी ओर, शिवसेना (UBT) नेतृत्व का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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महाराष्ट्र की राजनीति पर असर
यदि सांसदों का कोई बड़ा समूह वास्तव में शिंदे गुट में शामिल होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़े पुनर्संरेखण का संकेत होगा। इससे न केवल उद्धव ठाकरे की संसदीय ताकत कमजोर होगी, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें उन छह सांसदों के जवाब पर टिकी हैं, जिन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। उनके अगले कदम से ही साफ होगा कि यह सिर्फ नाराजगी है या फिर शिवसेना (UBT) एक नई राजनीतिक टूट की ओर बढ़ रही है।
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