‘जंगलराज’ से ‘जीरो री-पोलिंग’ तक… बिहार ने बदली अपनी चुनावी पहचान

Bihar Elections: बिहार ने 2025 के विधानसभा चुनाव में वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना लंबे समय तक असंभव मानी जाती रही। वर्षों तक चुनावी हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और धांधली की घटनाओं से जूझते रहे इस राज्य ने इस बार ऐसा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव कराया कि चुनाव आयोग ने इसे “परफेक्ट पोलिंग मॉडल” तक करार दिया है। सबसे अहम उपलब्धि रही—67.13 प्रतिशत मतदान, जो अब तक का सर्वाधिक है।

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूरे बिहार में एक भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। चुनाव आयोग का कहना है कि यह पहली बार है जब राज्य ने ज़ीरो री-पोलिंग के साथ विधानसभा चुनाव संपन्न किए हैं। मतदान प्रक्रिया के दौरान न तो कोई तनाव की स्थिति बनी, न हिंसा की कोई घटना सामने आई और न ही किसी पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई।

यह उपलब्धि इसलिए और भी उल्लेखनीय है क्योंकि बिहार का चुनावी इतिहास अक्सर अराजकता व हिंसा से भरा रहा है।

  • 1985 में, चुनावी हिंसा में 63 लोग मारे गए थे और 156 बूथों पर दोबारा चुनाव कराने पड़े।
  • 1990 के चुनाव भी बेहद हिंसक साबित हुए और 87 लोगों की जान गई।
  • 1995 में, स्थिति इतनी खराब थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को राज्य में चुनाव चार बार स्थगित करने पड़े।
  • 2005 में, कदाचार और हिंसा की वजह से 660 केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ था।

इन घटनाओं के मद्देनज़र 2025 का शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव राज्य में हुए सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव को दर्शाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले दो दशकों में सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और चुनाव आयोग की रणनीति में सुधार ने चुनावी प्रणाली को धीरे-धीरे मजबूत बनाया। इस बार संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई, निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ाया गया और मतदान कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

मतदान के दिन शहरी और ग्रामीण—दोनों ही इलाकों में मतदाताओं की सक्रियता देखने को मिली। खासकर महिलाओं और युवा मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाया। मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें इस बात का संकेत थीं कि बिहार के लोग अब अपने वोट की ताकत को लेकर अधिक जागरूक हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव बताता है कि बिहार ने “जंगलराज” की पुरानी छवि से दूरी बना ली है और अब राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। एक समय जहां चुनावी हिंसा राज्य की पहचान बन गई थी, वहीं अब बिहार शांतिपूर्ण, पारदर्शी और रिकॉर्ड मतदान वाले चुनाव का उदाहरण पेश कर रहा है।

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कुल मिलाकर, 2025 का यह चुनाव न केवल प्रशासनिक दक्षता का परिणाम है, बल्कि यह बिहार में उभरते सामाजिक बदलाव और मजबूत लोकतांत्रिक संस्कृति का प्रतीक भी बन गया है। राज्य की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों के लिए देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।

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