
‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज मजबूत करने की पहल, जयशंकर ने पेश की रणनीति
Global South Countries Meeting: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र के इतर आयोजित ‘समान विचारधारा वाले ग्लोबल साउथ देशों’ की उच्चस्तरीय बैठक में ग्लोबल साउथ देशों के बीच एकजुटता और बहुआयामी सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
बहुपक्षीय दृष्टिकोण और सहयोग की अपील
जयशंकर ने बैठक में कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को राजनीति, कूटनीति, विकास और प्रौद्योगिकी सहित सभी क्षेत्रों में मिलकर समाधान खोजने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि इन देशों को अपनी क्षमताओं, अनुभवों और उपलब्धियों का लाभ एक-दूसरे के लिए उठाना चाहिए।
वे क्षेत्रों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि टीकों (वैक्सीन), डिजिटल क्षमताओं, शिक्षा, कृषि पद्धतियाँ और लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
उभरती तकनीकों पर ध्यान
जयशंकर ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए ग्लोबल साउथ के देशों को नई और उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावनाओं पर विचार करना चाहिए।
राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद की प्रक्रियाओं में सुधार के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा बहुपक्षीय मंचों का उपयोग करके एकजुटता बढ़ाई जा सकती है।
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बैठक में शामिल देशों की सहभागिता
इस उच्चस्तरीय बैठक में कुल 18 देश शामिल हुए, जिनमें सिंगापुर, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, क्यूबा, चाड, जमैका, वियतनाम, मॉरीशस और मोरक्को जैसे देश शामिल थे। मालदीव के विदेश मंत्री ने कहा,
“ग्लोबल साउथ की शक्ति उसकी एकता और सामूहिक कार्रवाई में निहित है। मालदीव समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने का काम करता रहेगा।”
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भारत की वैश्विक भूमिका
जयशंकर ने बैठक में भारत की ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में सक्रिय भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस मंच का उपयोग कर इन देशों की साझा समस्याओं का समाधान खोजने और विकास संबंधी पहल को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है।
इस बैठक का उद्देश्य ग्लोबल साउथ के देशों को एक साझा रणनीति के तहत विकसित करना, तकनीकी और आर्थिक सहयोग बढ़ाना और बहुपक्षीय कूटनीति में अपनी आवाज मजबूत करना है।
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