समुद्र की गहराई में दुश्मन नहीं, संकट से लड़ेगा INS निपुण; नौसेना में शामिल हुआ खास पोत…

80% स्वदेशी तकनीक से तैयार INS निपुण सैचुरेशन डाइविंग, DSRV और ROV जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है, जो गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव और अंडरवाटर ऑपरेशन में नौसेना की ताकत बढ़ाएगा।

INS Nipun Commissioned: भारतीय नौसेना की अंडरवाटर ऑपरेशनल क्षमता को सोमवार को बड़ी मजबूती मिली। नौसेना ने मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में अपने दूसरे स्वदेशी निस्तार-क्लास डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निपुण को औपचारिक रूप से कमीशन किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की मौजूदगी में हुए समारोह के साथ यह पोत सक्रिय सेवा में शामिल हो गया।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम द्वारा बनाए गए INS निपुण को खास तौर पर गहरे समुद्र में डाइविंग, अंडरवाटर इंटरवेंशन और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसे 30 जुलाई 2026 को नौसेना को सौंपा गया था।

क्या है INS निपुण?
INS निपुण एक सामान्य युद्धपोत नहीं, बल्कि विशेष अभियानों के लिए तैयार डाइविंग सपोर्ट वेसल है। इसका काम समुद्र की गहराई में नौसेना के गोताखोरों और अंडरवाटर उपकरणों को सहायता देना, बचाव अभियान चलाना तथा पानी के भीतर जरूरी तकनीकी गतिविधियों को सपोर्ट करना है।

यह पोत आधुनिक नेविगेशन, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट और सटीक स्टेशन-कीपिंग सिस्टम से लैस है। इसके अलावा इसमें डाइविंग, अंडरवाटर इंटरवेंशन और मेडिकल सपोर्ट के लिए विशेष सुविधाएं दी गई हैं।

करीब 80 फीसदी स्वदेशी सामग्री
INS निपुण का निर्माण भारत में हुआ है और इसमें लगभग 75 से 80 फीसदी तक स्वदेशी सामग्री होने की जानकारी सामने आई है। सरकारी प्रेस सूचना के अनुसार इसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है, जबकि कुछ रिपोर्टों में लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट बताया गया है। इसलिए इसे व्यापक रूप से उच्च स्वदेशीकरण वाला नौसैनिक प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।

यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सैचुरेशन डाइविंग में भी सक्षम
INS निपुण की सबसे अहम क्षमताओं में डीप-सी सैचुरेशन डाइविंग शामिल है। इस तकनीक के जरिए प्रशिक्षित गोताखोर समुद्र की गहराई में लंबे समय तक काम कर सकते हैं।

पोत में आधुनिक डाइविंग सिस्टम और साइड डाइविंग स्टेज भी मौजूद है। इसके जरिए समुद्र के भीतर निरीक्षण, रखरखाव, बचाव और अन्य विशेष अभियानों को सहायता दी जा सकती है।

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पनडुब्बी हादसे में ऐसे करेगा मदद
INS निपुण की सबसे रणनीतिक भूमिकाओं में से एक पनडुब्बी रेस्क्यू है। इसे Deep Submergence Rescue Vehicle (DSRV) के मदर शिप के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर किसी पनडुब्बी में समुद्र के भीतर दुर्घटना हो जाती है और उसमें मौजूद नौसैनिक फंस जाते हैं, तो DSRV को घटनास्थल तक पहुंचाकर बचाव अभियान चलाया जा सकता है। INS निपुण इस पूरी प्रक्रिया में जरूरी प्लेटफॉर्म, तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराएगा।

ROV भी करेगा अंडरवाटर ऑपरेशन
पोत में Remotely Operated Vehicles (ROVs) भी मौजूद हैं। ये बिना गोताखोर को सीधे जोखिम में डाले समुद्र के भीतर निरीक्षण और सल्वेज जैसे कामों में मदद कर सकते हैं।

इससे INS निपुण की अंडरवाटर इंटरवेंशन क्षमता और बढ़ जाती है। यानी यह सिर्फ पनडुब्बी रेस्क्यू तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्र के भीतर कई तरह के तकनीकी अभियानों में उपयोगी होगा।

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पश्चिमी समुद्री तट पर बढ़ेगी क्षमता
INS निपुण की तैनाती के साथ भारतीय नौसेना के पास अब निस्तार-क्लास के दो डाइविंग सपोर्ट वेसल हो गए हैं। इसकी बहन पोत INS निस्तार पूर्वी नौसैनिक कमान के साथ काम कर रही है, जबकि INS निपुण पश्चिमी तट की जरूरतों को पूरा करेगा।

इससे नौसेना को दो जहाज-दो तट के आधार पर डीप-सी डाइविंग, अंडरवाटर इंटरवेंशन और पनडुब्बी रेस्क्यू क्षमता मिलती है।

मेडिकल सुविधाओं से भी लैस
गहरे समुद्र में डाइविंग ऑपरेशन के दौरान मेडिकल सपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होता है। INS निपुण में डाइविंग से जुड़ी चिकित्सा जरूरतों के लिए विशेष मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पोत में अस्पताल, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं भी हैं।

इससे समुद्र में लंबे और जोखिम भरे डाइविंग अभियानों के दौरान किसी आपात स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी।

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हिंद महासागर में भारत को क्या फायदा?
हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सिर्फ युद्धपोत और पनडुब्बियां होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए अंडरवाटर सपोर्ट, रखरखाव और रेस्क्यू क्षमता भी जरूरी है।

INS निपुण इस कमी को दूर करने में मदद करेगा। किसी पनडुब्बी के संकट में फंसने या समुद्र के भीतर किसी विशेष ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर नौसेना के पास अब बेहतर और समर्पित प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा।

आत्मनिर्भर भारत के लिए क्यों खास?
INS निपुण का निर्माण भारत में होना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से डाइविंग सपोर्ट और पनडुब्बी रेस्क्यू जैसे जटिल प्लेटफॉर्म का घरेलू निर्माण भारत की बढ़ती तकनीकी और जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, INS निपुण भारतीय नौसेना की युद्धक ताकत बढ़ाने से ज्यादा उसकी गहरे समुद्र में बचाव, डाइविंग और अंडरवाटर इंटरवेंशन क्षमता को मजबूत करता है। इसके नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और पनडुब्बी रेस्क्यू तैयारियों को खास तौर पर पश्चिमी समुद्री तट पर बड़ा बल मिला है।

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