
सौभाग्य और ज्ञान का पर्व है कार्तिक मास की लाभ पंचमी, जानें महत्व
Labh Panchami 2025: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लाभ पंचमी या सौभाग्य और ज्ञान पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व दीपावली के पांच दिन बाद आता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष पूजा और शुभ कार्य करने से व्यवसाय और जीवन में लाभ की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषीय स्थिति
- सूर्य तुला राशि में रहेंगे।
- चंद्रमा सुबह 10:46 तक वृश्चिक राशि में रहेगा, इसके बाद धनु राशि में गोचर करेगा।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:27 तक।
- राहुकाल: शाम 4:17 से 5:41 तक।
लाभ पंचमी का महत्व
लाभ पंचमी का पर्व व्यवसाय, शिक्षा और धन से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसे विशेष रूप से गुजरात में मनाया जाता है, जहां यह नववर्ष के पहले कार्य दिवस के रूप में भी लोकप्रिय है। इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य से व्यापार में लाभ, आर्थिक समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
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परंपराएं और रिवाज
- व्यवसायी अपने कारोबार को नए सिरे से शुरू करते हैं।
- नई डायरी खोलकर बाईं ओर ‘शुभ’, दाईं ओर ‘लाभ’, और केंद्र में स्वास्तिक बनाकर व्यापार प्रारंभ करते हैं।
- ऐसा करने से मुनाफे और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- चांदी या पीतल का कछुआ खरीदकर घर लाना आर्थिक समृद्धि का संकेत है।
- मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर सात कन्याओं को भोग करवाया जाता है।
- पूजा स्थल और तिजोरी में हल्दी की गांठ और फूल रखने से घर में बरकत बनी रहती है।
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लाभ पंचमी का दिन सौभाग्य, ज्ञान और आर्थिक समृद्धि से जुड़ा हुआ है। इस दिन की पूजा और परंपराओं का पालन करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव, व्यवसाय में लाभ और घर में खुशहाली आती है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि व्यापारिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्व रखता है।
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