सारा मोइन ने रचा इतिहास: देखने-सुनने-बोलने में असमर्थ होकर भी ISC में 98.7%

UP News: Lucknow की सारा मोइन ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। देखने, सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद सारा ने ISC 2026 (12वीं) परीक्षा में 98.7% अंक हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्होंने Christ Church College में ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम में टॉप किया और पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गईं।

लखनऊ: शानदार प्रदर्शन से चौंकाया

सारा के अंक उनकी मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण हैं।

  • ज्योग्राफी: 100/100
  • मास मीडिया एंड कम्युनिकेशन: 100/100
  • अंग्रेजी: 98
  • इतिहास: 97
  • मनोविज्ञान: 96

उनकी इस उपलब्धि के चलते शिक्षक और सहपाठी उन्हें ‘हेलेन केलर’ कहकर बुलाते हैं।

बीमारी ने छीन ली क्षमताएं

सारा जन्म से दृष्टिबाधित थीं, लेकिन कक्षा 3 तक सुन सकती थीं। इसके बाद उन्हें Sarcoidosis नाम की दुर्लभ बीमारी हुई, जिसने धीरे-धीरे उनकी सुनने और बोलने की क्षमता भी खत्म कर दी। इलाज के लिए परिवार ने कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली और उनके दो साल की पढ़ाई भी प्रभावित हुई।

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत

जब सारा की स्थिति बिगड़ी, तो उन्हें स्पेशल स्कूल भेजने की सलाह दी गई, लेकिन उनके माता-पिता ने हार नहीं मानी।

  • पिता ने नौकरी छोड़ दी (VRS लेकर)
  • मां और भाई ने घर पर पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया

परिवार ने तय किया कि सारा सामान्य बच्चों की तरह ही पढ़ाई करेंगी।

तकनीक और स्पर्श बनी ताकत

Christ Church College के प्रिंसिपल और शिक्षकों ने सारा को विशेष सहयोग दिया।
उनके शिक्षक सलमान अली काजी ने उन्हें ‘ऑर्बिट रीडर’ (Orbit Reader) के जरिए पढ़ाया, जो ब्रेल तकनीक पर आधारित है।

पढ़ाई की प्रक्रिया बेहद कठिन थी:

  • किताबों को स्कैन कर डिजिटल फाइल में बदला जाता
  • डिवाइस उसे ब्रेल में बदलता
  • मां हथेली पर अक्षर लिखकर पढ़ाई में मदद करतीं

 IAS बनने का सपना

सारा ने 10वीं में भी 95% अंक हासिल किए थे। अब उनका लक्ष्य सिविल सेवा (IAS) में जाकर देश की सेवा करना है।उनकी सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही सहयोग से कोई भी मुश्किल असंभव नहीं रहती।

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