
बकरीद से पहले मुस्लिम धर्मगुरुओं का संदेश, कानून के दायरे में हो कुर्बानी…
Lucknow News: राजधानी लखनऊ में मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलमा ने बकरीद से पहले महत्वपूर्ण अपील जारी की है। शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के प्रमुख धर्मगुरुओं ने लोगों से कहा है कि बकरीद पर केवल उन्हीं जानवरों की कुर्बानी की जाए, जिनकी देश के कानून में अनुमति है।
साथ ही उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी उठाई और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद चर्चा तेज
हाल ही में Calcutta High Court ने अपने एक फैसले में कहा था कि गाय की कुर्बानी ईद-उल-अजहा का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और यह इस्लाम में जरूरी नहीं मानी जाती।
इस फैसले के बाद लखनऊ के कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कानून और धार्मिक संवेदनशीलता का सम्मान करने की अपील की।
‘कानून के दायरे में हो कुर्बानी’
शिया धर्मगुरु Maulana Yasoob Abbas ने कहा कि बकरीद पर वही कुर्बानी की जानी चाहिए जिसकी संविधान और कानून में अनुमति हो।
उन्होंने कहा,
“हमें गाय की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखना चाहिए, क्योंकि हमारे हिंदू भाई उसकी पूजा करते हैं।”
उन्होंने लोगों से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और किसी भी तनावपूर्ण स्थिति से बचने की अपील की।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग
धर्मगुरुओं ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी की। उनका कहना है कि इससे देश में सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश जाएगा।
कुछ उलमा ने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था और कानून दोनों का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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सड़कों पर नमाज को लेकर भी बयान
धर्मगुरुओं ने सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज पढ़ने से बचने की भी अपील की। उनका कहना है कि धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन ऐसे तरीके से होना चाहिए जिससे आम लोगों को असुविधा न हो और कानून व्यवस्था प्रभावित न हो।
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सामाजिक सौहार्द पर जोर
शिया और सुन्नी समुदाय के उलमा ने संयुक्त रूप से कहा कि देश में भाईचारा और शांति बनाए रखना सबसे जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रहकर मनाएं ताकि किसी तरह का विवाद या तनाव पैदा न हो।
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