
ग्राम प्रधानों की ‘पावर’ खत्म नहीं होगी? पंचायत चुनाव को लेकर मंत्री राजभर ने दिए संकेत
UP Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश पंचायती के राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो ग्राम प्रधानों के नेतृत्व में प्रशासक नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है।
राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की पंचायत राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
क्या कहा मंत्री राजभर ने?
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि विभाग की ओर से मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को प्रस्ताव भेजा गया है कि पंचायत चुनाव में देरी होने की स्थिति में ग्राम प्रधानों के नेतृत्व में प्रशासक नियुक्त किए जाएं।
उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से लिया जाएगा और अगले एक-दो दिनों में स्थिति साफ हो सकती है।
पंचायत चुनाव में देरी की आशंका?
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में अगर चुनाव तय समय पर नहीं होते हैं, तो पंचायतों के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है।
राजभर के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि मौजूदा ग्राम प्रधानों की भूमिका चुनाव तक जारी रह सकती है।
ग्राम प्रधानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अगर सरकार ग्राम प्रधानों के नेतृत्व में प्रशासक नियुक्त करने का फैसला करती है, तो इससे हजारों ग्राम प्रधानों की प्रशासनिक और राजनीतिक सक्रियता बनी रहेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों की भूमिका विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यह फैसला पंचायत स्तर की राजनीति को सीधे प्रभावित कर सकता है।
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अब्बास अंसारी पर भी बोले राजभर
मरदह क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे राजभर ने Abbas Ansari को लेकर भी बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि अब्बास अंसारी समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, जो Suheldev Bharatiya Samaj Party के सिंबल पर चुनाव जीते थे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में अब्बास अंसारी को फिर से सुभासपा से टिकट दिया जाएगा, तो उन्होंने साफ कहा,
“कतई टिकट नहीं देंगे।”
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अखिलेश यादव का भी किया जिक्र
राजभर ने दावा किया कि Akhilesh Yadav ने खुद कहा था कि उन्होंने अपना नेता चुनाव लड़ने के लिए दिया था।
इस बयान को लेकर भी यूपी की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि इससे सपा और सुभासपा के रिश्तों को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।
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