
राजधानी में खनन माफिया बेखौफ… काकोरी में दिनदहाड़े खोदी जा रही LDA जमीन
Lucknow News: राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की भूमि पर अवैध खनन का धंधा बेखौफ जारी है। समदा चौकी क्षेत्र के अनंत नगर योजना, कलिया खेड़ा और प्यारेपुर जैसे इलाकों में खनन माफिया दिनदहाड़े सक्रिय हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय खामोश नजर आ रहे हैं।
पेट्रोल पंप के पीछे दिनदहाड़े खनन
ताजा मामला प्यारेपुर इलाके का है, जहां एक पेट्रोल पंप के पीछे खुलेआम मिट्टी का खनन किया जा रहा है। जेसीबी मशीनों से जमीन को खोदकर मिट्टी निकाली जा रही है और उसे डंपरों में भरकर दूसरी जगह पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह काम कई दिनों से लगातार चल रहा है, लेकिन किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई नहीं की।
खनन माफिया बेखौफ, प्रशासन नदारद
स्थानीय निवासियों का कहना है कि खनन माफिया पूरी तरह संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। भारी मशीनों और ट्रकों की आवाजाही से साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर अवैध खनन हो रहा है।
इसके बावजूद न तो पुलिस और न ही खनन विभाग की ओर से कोई सख्ती दिखाई दे रही है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
पहले भी सामने आते रहे हैं अवैध गतिविधियों के मामले
काकोरी क्षेत्र पहले भी अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण को लेकर चर्चा में रहा है। हाल के महीनों में एलडीए ने यहां कई बड़े अभियान चलाकर अवैध कॉलोनियों और निर्माणों को ध्वस्त किया था। एक कार्रवाई में करीब 43.75 एकड़ क्षेत्र में फैले अवैध निर्माण हटाए गए थे , जबकि एक अन्य अभियान में 500 बीघा से ज्यादा जमीन पर बनी अवैध प्लॉटिंग पर बुलडोजर चलाया गया ।
इन सख्त कार्रवाइयों के बावजूद अब उसी क्षेत्र में अवैध खनन का जारी रहना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
सरकारी जमीन को हो रहा भारी नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अवैध खनन से न सिर्फ सरकारी जमीन को नुकसान होता है, बल्कि भविष्य की विकास योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। काकोरी क्षेत्र में एलडीए की कई आवासीय और औद्योगिक परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, ऐसे में भूमि का इस तरह दोहन चिंता का विषय है।
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शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे खनन माफियाओं के हौसले और बढ़ गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी जमीन का बड़ा हिस्सा अवैध खनन की भेंट चढ़ सकता है।
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प्रशासन की भूमिका पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधि प्रशासन की नजर से कैसे बच रही है? क्या यह लापरवाही है या फिर मिलीभगत?
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और एलडीए इस मामले में कब तक चुप्पी साधे रहते हैं या फिर अवैध खनन के इस खेल पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं।
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