
जनता और राष्ट्र की सेवा करना ही सुशासन का मूल आधार:PM Modi
Prime Minister Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक सुभाषित शेयर किया है, जिसमें जनता और राष्ट्र की सेवा से संबंधित संदेश दिया गया है। पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “पालयन् प्रकृतिं राजा सुखी भवति नान्यथा। प्रकृतिश्च हिता यस्य स राजा सर्वकामधुक्॥” शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि जनता और राष्ट्र की सेवा करना ही सुशासन का मूल आधार है। जो नेतृत्व निःस्वार्थ भाव से जन-कल्याण और लोक हित में समर्पित रहता है, वही राष्ट्र में समृद्धि, शांति और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करता है।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक ‘कामंदकीय नीतिसार’ (या कामंदक नीतिसार) नामक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ से लिया गया है। इस ग्रंथ को आचार्य कामंदक ने रचा है। उन्होंने इस ग्रंथ में राज्य, राजा के कर्तव्य (राजधर्म), और शासन व्यवस्था के सिद्धांतों के बारे में बताया है।
इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि एक राजा या शासक तभी सच्चा सुख और समृद्धि प्राप्त कर सकता है, जब वह अपनी प्रजा (जनता) का उचित पालन-पोषण करे और उसकी रक्षा करे। प्रजा की अनदेखी या उसका शोषण करके कोई भी शासक सुखी नहीं रह सकता।
इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि जिस राजा से उसकी प्रजा प्रेम करती है और जिसके राज्य में प्रकृति (पर्यावरण) संतुलित एवं हितकारी होती है, वह राजा सभी प्रकार की सिद्धियां और ऐश्वर्य प्राप्त करता है। ऐसा राजा ‘सर्वकामधुक्’ अर्थात अपनी प्रजा की सभी आकांक्षाओं को पूर्ण करने में समर्थ होता है और उसका राज्य कामधेनु के समान फलदायी बन जाता है।





