
छठ पूजा के पहले ट्रेनों को लेकर नए विवाद… RJD प्रमुख ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
Lalu Prasad Yadav: चार-दिनीय महापर्व छठ महापर्व शनिवार को “नहाय-खाय” के अनुष्ठान के साथ शुरू हो रहा है। पर्व का ये पहला दिन उन लाखों श्रमिकों और प्रवासी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अन्य राज्यों में काम कर रहे हैं और पर्व के अवसर पर अपने गांव-घर लौटते हैं।
इस बीच, रविवार को राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है और कहा है कि पर्व के लिए बिहार आने-जाने वालों की सुविधा सुनिश्चित करने में सरकार विफल रही है।
लालू यादव का आरोप
लालू प्रसाद यादव ने बताया कि सरकार ने यह घोषणा की थी कि देश की कुल 13,198 ट्रेनों में से छठ पर्व को लेकर 12,000 रेलगाड़ियाँ बिहार के लिए चलायी जाएँगी, लेकिन वास्तविकता में यह दावा “सफेद झूठ” निकला। उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) शासन में बिहार के लोगों को पलायन का दंश झेलना पड़ रहा है और इस पर्व पर भी उन्हें अमानवीय तरीके से ट्रेनों में सफर करना पड़ रहा है।
लालू ने आगे कहा कि “डबल इंजन सरकार” की गलत नीतियों के कारण प्रतिवर्ष बिहार से 4 करोड़ से अधिक लोग अन्य राज्यों में काम के लिए जा रहे हैं, लेकिन राज्य में कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हुआ है।
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सरकार-दावा एवं विरोधाभास
- Indian Railways ने दावा किया है कि इस पर्व के लिए 12,000 से अधिक विशेष ट्रेनों (special trains) का संचालन किया गया है।
- लालू के अनुसार यह संख्या केवल दावे तक सीमित रही है और बिहार की ओर पर्याप्त संख्या में गाड़ियाँ नहीं पहुँचीं, अतः बिहार-यात्रियों को भारी भीड़ एवं असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
- यह मामला चुनाव-पूर्विप्रसंग में भी देखा जा रहा है क्योंकि बिहार विधान सभा चुनाव दो चरणों में 6 नवंबर एवं 11 नवंबर को होने वाले हैं।
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प्रवासी, यात्रा-दबाव और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
छठ के अवसर पर बड़ी संख्या में बिहार-वासी अन्य राज्यों से अपने घर लौटते हैं। ऐसे में ट्रेनों की उपलब्धता, कोच-बोर्डिंग, टिकट-प्राप्ति, प्लेटफॉर्म-भीड़, सुरक्षा व सफाई जैसे प्रश्न-चिन्ह मौजूद रहते हैं। एक रिपोर्ट में वर्णित है कि यात्रियों की भीड़ बढ़ने पर ट्रेनों में अत्यधिक क्रॉडिंग और असमय यात्रा के दबाव बढ़ जाते हैं। राजनीतिक रूप से यह एक संवेदनशील विषय है, क्योंकि इसे सामाजिक असमानता, राज्य-केन्द्र संबंध, विकास-अवसर व प्रवासी-श्रमिकों की दशा से जोड़ा जा रहा है।
आने वाले दिनों में देखा जाना है कि इस मुद्दे पर केंद्र या राज्य सरकार क्या जवाब देती है, तथा ट्रेनों की स्थिति, यात्रियों की सुविधा व यात्रा-अनुभव में वास्तविक सुधार होता है या नहीं।
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