महंगाई का नया दौर? सरकार जल्द कर सकती है बड़े आर्थिक बदलाव…
Govt. New Plan: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार आने वाले दिनों में कई बड़े आर्थिक फैसले ले सकती है। हाल ही में सरकार ने सोना-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है। इसका मकसद गैर-जरूरी आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना बताया जा रहा है।
अब विदेशी ब्रोकरेज फर्म Nomura Holdings की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में सरकार और भी कई सख्त कदम उठा सकती है। इनमें आयात नियमों से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक कई अहम बदलाव शामिल हो सकते हैं।
1. गैर-जरूरी आयात पर सख्ती बढ़ सकती है
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स, लग्जरी आइटम्स और दूसरी गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर अतिरिक्त नियम लागू कर सकती है। इससे विदेशों से आने वाले महंगे सामानों की संख्या कम करने की कोशिश होगी ताकि डॉलर की बचत की जा सके।
मोबाइल, हाई-एंड गैजेट्स, लक्जरी उत्पाद और कुछ प्रीमियम उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
2. विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए बॉन्ड जारी हो सकते हैं
सरकार विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए विशेष बॉन्ड जारी कर सकती है। माना जा रहा है कि एनआरआई और विदेशी निवेशकों को ध्यान में रखते हुए डॉलर आधारित बॉन्ड या विशेष निवेश योजनाएं लाई जा सकती हैं।
इससे सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से डॉलर जुटाने में मदद मिलेगी।
3. विदेशी निवेशकों को टैक्स राहत मिल सकती है
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार बॉन्ड निवेश पर टैक्स में राहत दे सकती है। इससे भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने की कोशिश होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश बढ़ता है तो रुपये पर दबाव कम हो सकता है।
4. पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं महंगे
सरकार जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति दे सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से भारत पर भी असर पड़ रहा है।
अगर तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। परिवहन महंगा होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
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5. करेंसी हेजिंग नियमों में बदलाव संभव
आयातकों के लिए करेंसी हेजिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव की संभावना जताई गई है। सरकार और रिजर्व बैंक ऐसे कदम उठा सकते हैं जिससे डॉलर की मांग को नियंत्रित किया जा सके और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोका जा सके।
इसका असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो बड़े पैमाने पर विदेशों से सामान आयात करती हैं।
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क्यों उठाए जा रहे ये कदम?
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण भारत सरकार एहतियाती रणनीति अपना रही है। सरकार की कोशिश है कि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे और अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव का असर कम हो।
हालांकि, इन संभावित फैसलों का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। महंगाई बढ़ने, आयातित सामान महंगे होने और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका से बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।
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