PhD में प्रवेश के लिए नया नियम लागू, यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट हुए खत्म…

West Bengal News: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ सहायता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से पीएचडी में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय स्तर की अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। इसके स्थान पर राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाओं के अंकों के आधार पर ही अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।

सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार अब पीएचडी में प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट (UGC-NET), यूजीसी-सीएसआईआर नेट (UGC-CSIR NET), गेट (GATE), आईसीएआर (ICAR), आईसीएमआर (ICMR), डीआरडीओ (DRDO), सीईईडी (CEED) और अन्य मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के स्कोर को आधार बनाया जाएगा। इन परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों को संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए बुलाया जाएगा और अंतिम चयन उसी के आधार पर किया जाएगा।

PAT और RET जैसी परीक्षाएं नहीं होंगी
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी सत्र के लिए कोई भी विश्वविद्यालय पीएचडी एडमिशन टेस्ट (PAT), रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट (RET) या अन्य विश्वविद्यालय स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं की अधिसूचना जारी नहीं करेगा। सभी संस्थानों को नए दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

इस फैसले का उद्देश्य राज्यभर में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को एक समान बनाना और अलग-अलग विश्वविद्यालयों की अलग प्रवेश परीक्षाओं से छात्रों को होने वाली परेशानी को कम करना है।

UGC नियम और NEP-2020 के अनुरूप लिया गया निर्णय
उच्च शिक्षा विभाग ने अपनी अधिसूचना में कहा कि यह निर्णय यूजीसी (पीएचडी डिग्री प्रदान करने के न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया) विनियम, 2016 तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है।

विभाग का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के माध्यम से शोध के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जा सकेगा। इससे प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और विश्वविद्यालयों के बीच अलग-अलग मानकों की समस्या भी समाप्त होगी।

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छात्रों को होगा फायदा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय, धन और तैयारी का अतिरिक्त बोझ कम होगा। एक ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के स्कोर के आधार पर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन किया जा सकेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शोध शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और राष्ट्रीय स्तर पर समान मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि कुछ विश्वविद्यालयों के लिए अपनी स्वतंत्र प्रवेश प्रक्रिया समाप्त करना प्रशासनिक बदलाव का विषय भी होगा।

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अगले सत्र से लागू होंगे नए नियम
उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से कहा है कि वे आगामी शैक्षणिक सत्र से नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करें। किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा अलग से पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं के अंकों और साक्षात्कार के आधार पर ही शोधार्थियों का अंतिम चयन किया जाएगा।

इस फैसले के बाद राज्य में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक केंद्रीकृत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

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