भावुक हुई संसद! अमित शाह ने सुनाई नक्सल पीड़ित बच्ची की कहानी…

Amit Shah in lok Sabha: अमित शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) के मुद्दे पर चर्चा के दौरान एक ऐसी कहानी सुनाई, जिसने पूरे सदन को भावुक कर दिया। गृह मंत्री ने नक्सल हिंसा से प्रभावित एक बच्ची का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे इस हिंसा ने मासूम जिंदगी को झकझोर कर रख दिया।

संसद में रखा सरकार का पक्ष
लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही बहस के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार देश को नक्सल हिंसा से मुक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने दावा किया कि:

“माओवादी और नक्सली हिंसा करने वालों के अब दिन लद चुके हैं।”

बच्ची की दर्दनाक कहानी ने किया भावुक
अपने संबोधन में अमित शाह ने एक नक्सल पीड़ित बच्ची का जिक्र करते हुए बताया:

बच्ची को महज 7 साल की उम्र में नक्सलियों ने अगवा कर लिया था
उसे बचपन से ही सामान्य जीवन जीने का मौका नहीं मिला

उन्होंने कहा कि जब उस बच्ची को नेल पॉलिश दी गई, तो वह रोने लगी।
जब उससे कारण पूछा गया, तो उसने कहा:

“मैं बचपन से पैंट-शर्ट में ही रही हूं, मैंने सामान्य जीवन कभी देखा ही नहीं…”

यह सुनकर सदन में मौजूद सभी लोग भावुक हो गए।

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नक्सलवाद का मानवीय पहलू
गृह मंत्री ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि नक्सलवाद सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि:

मानव जीवन और बचपन छीन लेने वाली त्रासदी है
यह परिवारों और समाज को गहराई से प्रभावित करता है

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सरकार का संकल्प
अमित शाह ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य है:

नक्सलवाद को जड़ से खत्म करना
प्रभावित क्षेत्रों में विकास और शांति स्थापित करना

लोकसभा में सुनाई गई यह कहानी नक्सल हिंसा की भयावह सच्चाई को सामने लाती है। यह केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों मासूम जिंदगियों के दर्द और संघर्ष की कहानी भी है, जिसे खत्म करना अब सरकार की प्राथमिकता है।

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