
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गया में पितृपक्ष महापर्व के दौरान किया पिंडदान और तर्पण
President Droupadi Murmu Gaya Visit: विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी गया इस समय पितृपक्ष महापर्व की पवित्रता और आस्था से सराबोर है। इसी अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को गया आगमन किया, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण रहा।
उनके दौरे को लेकर गयाजी जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. पूरे रूट पर वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जबकि वैकल्पिक मार्गों का प्लान तैयार किया गया है।
राष्ट्रपति का धार्मिक अनुष्ठान
राष्ट्रपति मुर्मू ने विष्णुपद मंदिर परिसर में पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए पिंडदान और तर्पण का अनुष्ठान किया। उनके इस कदम से गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता और भी बढ़ गई है।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।
- एयरपोर्ट से विष्णुपद मंदिर तक विशेष सुरक्षा की गई।
- जिला उपायुक्त शशांक शुभंकर और एसएसपी आनंद कुमार स्वयं उनके साथ मौजूद रहे।
- पूरे मार्ग पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
यह भी पढ़ें…
RJD में परिवारिक झगड़ा, रोहिणी यादव की टिप्पणियों ने बढ़ाई सियासी घमासान
श्रद्धालुओं के लिए दिशा-निर्देश
- पितृपक्ष मेला के चलते पहले ही लाखों श्रद्धालु गयाजी पहुंच चुके हैं।
- प्रशासन ने दर्शनार्थियों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का ही उपयोग करें।
- ट्रैफिक प्लान को अंतिम रूप दे दिया गया है और सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
यह भी पढ़ें…
जमुई में खेल मैदान से मिला माओवादी का धमकी भरा पर्चा, मंत्री और विधायक बने निशाना
पितृपक्ष महापर्व का महत्व
गया का पितृपक्ष न केवल बिहार बल्कि पूरे देश और विदेश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। धार्मिक मान्यता है कि फल्गु नदी के तट और विष्णुपद मंदिर में पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस महापर्व में हर साल लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस आगमन और अनुष्ठान ने गया के पितृपक्ष महापर्व को और अधिक विशिष्ट और गौरवपूर्ण बना दिया है। से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आकर इस महापर्व में शामिल होते हैं।
यह भी पढ़ें…





