
Karnataka में ‘रिवर्स ऑपरेशन लोटस’! MLC चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में हुई क्रॉस वोटिंग
Karnataka News: कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक गलियारों में ‘रिवर्स ऑपरेशन लोटस’ की चर्चा तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया, जिसके चलते सत्ताधारी कांग्रेस को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिला और उसने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली।
राजनीतिक विश्लेषक इसे झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार का जवाब भी बता रहे हैं, जहां कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस उम्मीदवार को नुकसान उठाना पड़ा था। अब कर्नाटक के नतीजों ने विपक्षी खेमे में नई हलचल पैदा कर दी है।
सात में से पांच सीटों पर कांग्रेस का कब्जा
कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटें अपने नाम कर लीं। वहीं बीजेपी को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। परिणामों के बाद सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस को मिले अतिरिक्त वोटों की हो रही है।
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस को लगभग 140 वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी को 151 वोट प्राप्त हुए। यानी उसे अनुमान से 11 वोट अधिक मिले। यही अतिरिक्त वोट अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
क्रॉस वोटिंग ने बदला पूरा गणित
चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे अपनी राजनीतिक सफलता बताया, जबकि विपक्षी दलों के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी और जेडीएस के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया।
इसी वजह से कांग्रेस को अतिरिक्त वोट मिले और उसका प्रदर्शन अपेक्षा से कहीं बेहतर रहा। इस घटनाक्रम ने यह संकेत भी दिया है कि विपक्षी खेमे में अंदरूनी असंतोष मौजूद हो सकता है।
झारखंड से जुड़ रही तुलना
राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव की तुलना झारखंड राज्यसभा चुनाव से की जा रही है। उस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार जीत नहीं सका था।
तब बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की थी। विपक्ष का आरोप था कि क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ। अब कर्नाटक में कांग्रेस को मिले अतिरिक्त वोटों को उसी राजनीतिक रणनीति का जवाब बताया जा रहा है।
डीके शिवकुमार के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा परिषद चुनाव था। ऐसे में इन नतीजों को राज्य सरकार और कांग्रेस संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के लिए भी यह परिणाम एक राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह जीत राज्य में कांग्रेस की मजबूत पकड़ को दर्शाती है।
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बीजेपी और जेडीएस के सामने चुनौती
चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी और जेडीएस दोनों दलों के सामने अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। यदि क्रॉस वोटिंग के आरोप सही साबित होते हैं तो दोनों दलों को आंतरिक स्तर पर जवाब तलाशना पड़ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे चुनावों में क्रॉस वोटिंग अक्सर दलों के भीतर असंतोष, नेतृत्व से नाराजगी या स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का संकेत होती है।
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कर्नाटक एमएलसी चुनाव के नतीजों ने केवल परिषद की सीटों का गणित नहीं बदला, बल्कि राज्य की राजनीति में नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, क्योंकि विपक्षी दल अपने विधायकों की भूमिका की समीक्षा कर सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि कांग्रेस ने इस चुनाव में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर राजनीतिक बढ़त हासिल की है, जबकि बीजेपी और जेडीएस को अपने संगठनात्मक ढांचे और विधायकों की एकजुटता पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।
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