महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फंसा पेंच, एनडीए ने शुरू की प्रत्याशियों की घोषणा

Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज होती जा रही हैं। सत्तारूढ़ एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) जहाँ अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुनावी अभियान की शुरुआत कर चुका है, वहीं विपक्षी महागठबंधन (Grand Alliance) अब भी सीट बंटवारे की खींचतान में उलझा हुआ है।

कांग्रेस और वीआईपी की बढ़ी मांगें
महागठबंधन के भीतर सीट-शेयरिंग को लेकर सहमति बनना मुश्किल दिख रहा है। कांग्रेस ने अब कम से कम 70 सीटों की माँग रख दी है और स्पष्ट किया है कि उसे “विनेबल सीटें” यानी जीत की अधिक संभावना वाली सीटें चाहिए। दूसरी ओर, विकाशशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने न केवल 60 सीटों की माँग की है, बल्कि उप मुख्यमंत्री पद का दावा भी ठोक दिया है। हालांकि गठबंधन सूत्रों का मानना है कि उन्हें अंततः 20 से 25 सीटों तक ही संतोष करना पड़ सकता है।

नए सहयोगी, नई उलझन
गठबंधन की जटिलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हाल ही में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और पशुपति कुमार पारस की लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) भी महागठबंधन से जुड़ गए हैं। ऐसे में पहले से ही खींचतान झेल रहे राजद, कांग्रेस और वीआईपी के बीच सीटों का संतुलन बनाना और कठिन हो गया है।

एनडीए ने बढ़ाया चुनावी कदम
दूसरी ओर, एनडीए ने चुनावी दौड़ में बढ़त बनाने की रणनीति अपनाई है। जेडीयू ने हाल ही में बक्सर जिले की राजपुर (SC रिजर्व) सीट से संतोष कुमार निराला को उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी का मानना है कि इस बार उसे बीजेपी से कम से कम एक सीट अधिक मिलनी चाहिए ताकि गठबंधन में उसकी स्थिति मजबूत बनी रहे। वहीं, भाजपा ने भी मोतिहारी से विधायक प्रमोद कुमार को उम्मीदवार बनाकर प्रचार की शुरुआत कर दी है।

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आरोप-प्रत्यारोप का दौर
चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर एआई वीडियो के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां का अपमान करने का आरोप लगाया है। एनडीए के नेताओं का कहना है कि यह न केवल प्रधानमंत्री की मां का अपमान है बल्कि हर भारतीय मां का भी। इधर महागठबंधन के नेता लगातार नीतीश कुमार और भाजपा की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि जनता बदलाव चाहती है।

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सीट-शेयरिंग में देरी बन सकती है हार की वजह
बिहार चुनाव 2025 में मुख्य लड़ाई केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं बल्कि गठबंधनों की एकजुटता और रणनीति पर भी निर्भर करेगी। महागठबंधन जितनी देर सीट-शेयरिंग को अंतिम रूप देने में लगाएगा, उतना ही उसका चुनावी अभियान कमजोर पड़ सकता है। दूसरी तरफ, एनडीए ने समय से पहले उम्मीदवार घोषित कर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है, जिससे उसके पक्ष में गति बन सकती है।

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