
चढ़ावे के बाद VIP दर्शन में भी खेल! बदरीनाथ धाम में नौटियाल की नई करतूत उजागर
उत्तराखंड के प्रसिद्ध Badrinath Temple में दान-चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली का नया मामला सामने आया है। इस प्रकरण में बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के तत्कालीन वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने मंदिर समिति की औपचारिक स्वीकृति के बिना श्रद्धालुओं से वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति व्यक्ति 1100 रुपये की वसूली कराई।
जानकारी के अनुसार, बदरीनाथ धाम में पूजा, अभिषेक, विशेष अनुष्ठान और अन्य सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित करने का अधिकार केवल बदरी-केदार मंदिर समिति के पास है। किसी भी नई व्यवस्था या शुल्क को लागू करने से पहले समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित होना और उसे विधिवत मंजूरी मिलना आवश्यक होता है। आरोप है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूली के मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
भीड़ के दौरान शुरू हुई कथित वसूली
मई और जून के दौरान बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। इस वजह से दर्शन के लिए लोगों को कई-कई घंटे तक कतार में इंतजार करना पड़ रहा था। ऐसी स्थिति में मंदिर समिति की ओर से बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीआईपी दर्शन की व्यवस्था संचालित की जाती थी, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और विशेष परिस्थितियों वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।
हालांकि, आरोप है कि इसी दौरान प्रमोद नौटियाल ने बिना अधिकृत अनुमति के वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति श्रद्धालु 1100 रुपये की राशि वसूलनी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि यह शुल्क मंदिर समिति के अधिकृत खाते या निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं लिया गया, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुजारियों ने पहले ही जताई थी आपत्ति
सूत्रों के अनुसार, मंदिर से जुड़े कुछ पुजारियों और कर्मचारियों ने इस व्यवस्था पर पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि जब समिति की ओर से नि:शुल्क वीआईपी दर्शन की सुविधा उपलब्ध है, तब अलग से शुल्क वसूलना नियमों के विरुद्ध है। इसके बावजूद कथित रूप से यह व्यवस्था कुछ समय तक जारी रही।
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पहले भी सामने आ चुका है चढ़ावा हेराफेरी का मामला
इससे पहले भी बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया था। उसी प्रकरण की जांच के दौरान कई वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी पड़ताल की जा रही है। अब वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।
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जांच एजेंसियों की नजर
मामले के सार्वजनिक होने के बाद संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजस्व व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं।
बदरीनाथ धाम देश के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दान-चढ़ावे और दर्शन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं, दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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