
पति की दीर्घायु, धन-धान्य की प्राप्ति के लिए करे वट सावित्री पूजन
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनायी जाती है जो इस वर्ष आगामी 06 जून को है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं।
वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat)ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनायी जाती है जो इस वर्ष आगामी 06 जून को है। वट वृक्ष की पूजा कर सुहागिनें अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि इस व्रत को करने से अखण्ड सौभाग्य व अच्छे वर की प्राप्ति होती है। व्रत के प्रभाव से पति-पत्नी के संबंधों में भी सुधार आता है एवं खराब हुए रिश्ते भी फिर से जुड़ जाते हैं। सावित्री पूजन की तैयारी में सुहागिनें जुट गयी हैं। हिन्दू धर्मानुसार, वट सावित्री व्रत का सुहागिन स्त्रियों के लिए बहुत अधिक महत्व होता है। इस दिन महिलाएं अपने सुखद वैवाहिक जीवन के लिए वट वृक्ष का पूजन करती है। माना जाता है इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यभामा के प्राण यमराज से भी वापस ले लिए थे। इस व्रत में बरगद के पेड़ का खास महत्व होता है।
वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष की पूजा है विशेष महत्व
हिन्दू धर्मानुसार, वट वृक्ष के जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और पत्तों में भगवान शिव का वास होता है। मां सावित्री भी वट वृक्ष में निवास करती हैं। वट वृक्ष की पूजा न सिर्फ अक्षय सौभाग्य बल्कि अक्षय उन्नति और दीर्घायु भी देता है। इस प्रकार से सुहागिनों के लिए वट सावित्री पूजन का विशेष महत्व होता है।
व्रत का शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत के पूजन में शुभ मुहूर्त का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 05 जून की रात 07.54 बजे से शुरू होकर 06 जून की शाम 06.07 बजे तक रहेगी। इस दिन पूजा के लिए सुबह 10.36 बजे से दोपहर 02.04 बजे तक शुभ मुहूर्त है।
विधिपूर्वक करे पूजन
-सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल साड़ी पहनें।
-बरगद के पेड़ के नीचे और पूजा स्थल को साफ करें।
-इसके बाद अशुद्धियों को दूर करने के लिए थोड़ा सा गंगाजल छिड़कें।
-फिर सप्तधान्य को एक बांस की टोकरी में भर लें और ब्रह्मा जी की प्रतिमा स्थापित करें।
-दूसरी टोकरी में सप्तधान्य भरकर उसमें सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें।
-दूसरी टोकरी को पहली टोकरी के बाईं ओर रखें।
-अब इन दोनों टोकरियों को बरगद के पेड़ के नीचे रख दें।
-पेड़ पर चावल के आटे की छाप लगाएं।
-पूजा के दौरान बरगद के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं।
-इसके बाद एक हाथ में पंखा लेकर बरगद पेड़ के नीचे जाएं।
पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं, उसके बाद प्रसाद चढ़ाकर धुप, दीपक जलाएं।
-सच्चे मन से पूजा करके अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
-पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और सावित्री मां से आशीर्वाद लें ताकि आपके पति दीर्घायु हों।
-इसके बाद वट 108 बार अथवा कम से कम 07 बार अवश्य परिक्रमा करें। व्रत की कथा सुनें।
-व्रती बड़ों का आशीर्वाद लें। पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
-अंत में एक टोकरी में फल, अनाज, कपड़े आदि रखकर किसी ब्राह्मण को दान कर दें।





