
जंतर-मंतर केस में CJI का बड़ा आदेश, यौन उत्पीड़न के आरोपों पर जल्द आएगी अंतरिम रिपोर्ट
CJP Protest Case: CJI सूर्यकांत ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों की प्राथमिकता से जांच के निर्देश दिए
Supreme Court: जंतर-मंतर पर छात्र-छात्रों द्वारा किये गए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्राओं से कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह के मामलों की जांच को उच्चस्तरीय समिति की प्राथमिकताओं में रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने महिला प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर भी छात्राओं की ओर से ऐसी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया।
कमेटी को प्राथमिकता से जांच के निर्देश
CJI सूर्यकांत ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति को महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों की प्राथमिकता से जांच करने को कहा गया है।
उन्होंने बताया कि समिति इन आरोपों पर जल्द अंतरिम रिपोर्ट भी सौंप सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति के अध्यक्ष को शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की स्वतंत्रता दी गई है, ताकि पीड़िताएं अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
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अलग जांच की मांग
अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने मांग की कि यौन उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए किसी जिला जज को नियुक्त किया जाए। उनका कहना था कि इससे पीड़ित महिलाएं सीधे शिकायत दर्ज करा सकेंगी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बताया कि इस मुद्दे पर अलग से रिट याचिका भी दाखिल की गई है। अदालत ने कहा कि मौजूदा जांच समिति को भी इन आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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पांच सदस्यीय समिति कर रही जांच
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर समेत देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है। इसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।
अदालत ने समिति को लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और महिला प्रदर्शनकारियों से कथित छेड़छाड़ जैसे संवेदनशील मामलों पर विशेष प्राथमिकता देने को कहा है। अब समिति की अंतरिम रिपोर्ट के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
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