
CEC से बहस पड़ी भारी! IAS अनुराग यादव चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाए गए…
UP News: चुनावी माहौल के बीच एक अहम प्रशासनिक कार्रवाई में भारत निर्वाचन आयोग ने यूपी कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी अनुराग यादव को पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक के पद से तत्काल हटा दिया है। यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ हुई तीखी बहस के बाद उठाया गया, जिसने नौकरशाही और चुनावी तंत्र दोनों में हलचल पैदा कर दी है।
कैसे बढ़ा विवाद?
बुधवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में, जिसकी अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कर रहे थे, चुनाव तैयारियों की समीक्षा की जा रही थी।
- बैठक के दौरान अनुराग यादव से उनके क्षेत्र के पोलिंग स्टेशनों का आंकड़ा मांगा गया
- जवाब देने में हुई देरी पर CEC ने टिप्पणी की
- इस पर यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए अपनी वरिष्ठता का हवाला दिया और आपत्ति जताई
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान दोनों के बीच संवाद का लहजा तीखा हो गया, जिसे आयोग ने गंभीरता से लिया।
आयोग का त्वरित फैसला
घटना के कुछ ही घंटों के भीतर भारत निर्वाचन आयोग ने कड़ा कदम उठाते हुए IAS अनुराग यादव को चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटा दिया। उन्हें तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया। आयोग ने इसे सेवा नियमों और अनुशासन के उल्लंघन के रूप में देखा।
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लगातार दूसरी कार्रवाई
महत्वपूर्ण बात यह है कि:
- पिछले 15 दिनों में यह अनुराग यादव के खिलाफ दूसरा बड़ा एक्शन है
- इससे उनके कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवहार पर सवाल खड़े हो रहे हैं
चुनावी संदर्भ में अहम संदेश
पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच यह कार्रवाई कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि अनुशासन सर्वोपरि है
- वरिष्ठ अधिकारियों को भी जवाबदेही से छूट नहीं
- चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी
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व्यापक संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ एक अधिकारी पर कार्रवाई नहीं, बल्कि एक व्यापक संदेश है:
- चुनाव ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह का असंयम बर्दाश्त नहीं होगा
- संस्थागत अनुशासन और पद की गरिमा को बनाए रखना अनिवार्य है
भारत निर्वाचन आयोग का यह फैसला बताता है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। IAS अनुराग यादव का मामला प्रशासनिक अनुशासन, जवाबदेही और संस्थागत मर्यादा—तीनों के महत्व को रेखांकित करता है।
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