एमएलसी ए.के. शर्मा पर दांव लगाकर फायदे में रहेगी भाजपा, पढ़ें यह राजनैतिक विश्लेषण

लखनऊ। वैश्विक महामारी कोरोना ने दुनिया भर में तबाही मचाने के साथ-साथ तमाम सरकारों की क्षमता व विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। कहीं तो इस तबाही से निपटने की चर्चा और प्रशंसा हुई तो कहीं पर कोरोना की दूसरी लहर ने व्यवस्थागत कमियों को उजागर कर दिया।

भारत के सन्दर्भ में बात करें तो कई राज्यों व केंद्र सरकार के कामकाज पर तो जनता संतोष व्यक्त कर रही है लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य उप्र में कोविड नियंत्रण को लेकर लोगों में भारी असंतोष है।

अब थोड़ा पीछे चलें तो 2014 में देश की जनता ने करीब 30 सालों बाद स्पष्ट बहुमत की एक राजनैतिक दल (भाजपा) की सरकार बनाई। हालांकि सरकार एनडीए की थी, जिसमे कई दल शामिल थे, लेकिन इसके सबसे बड़े घटक दल भाजपा की अपनी सीटें स्पष्ट बहुमत से ज्यादा थीं, मतलब सरकार चलाने में कोई खींचतान का संकट नहीं था।

नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। लोगों की अपेक्षाएं जरूरत से ज्यादा थीं और इसे कहने में कोई गुरेज नहीं कि मोदी सरकार अपेक्षाओं पर खरी उतरी। मोदी की लोकप्रियता जनता के सर चढ़कर बोलने लगी।

फिर आया साल 2017। 2007 में बसपा फिर 2012 में सपा के नेतृत्त्व की सरकारों के ऊबी जनता को भाजपा में अपना भविष्य दिखा। मोदी की अपार लोकप्रियता को भुनाते हुए भाजपा ने प्रदेश में प्रचंड बहुमत (325/403) की सरकार बनाई। तमाम कयासों को पीछे छोड़ते हुए योगी आदित्यनाथ सूबे के मुख्यमंत्री बने।

प्रचंड बहुमत व केंद्र में भी माफिक सरकार के चलते कामकाज अच्छे से चलने लगा। फिर आया साल 2019, मोदी सरकार और अधिक बहुमत से सत्तासीन हुई। मोदी सरकार ने अपने बहुत पुराने एजेंडे के मुताबिक धारा 370 को निरस्त करने से लेकर, तीन तलाक बिल सहित अनेक बड़े व अच्छे कार्य किए।

इस बीच देश के सबसे पुराने मसले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया जिसमे विवादित भूमि पर मंदिर बनने की आदेश कोर्ट ने सुनाया। हालाँकि यह मसला देश की सबसे बड़ी अदालत के माध्यम से सुलझा फिर भी इसका पूरा श्रेय जनता ने मोदी व योगी सरकार को दिया।

तत्पश्चात आया कोरोना काल। कोरोना के पहले लहर में तो उप्र की जनता आपदा के बावजूद सरकार के साथ खड़ी दिखी लेकिन 2021 की शुरुआत में आई कोरोना की दूसरी व पहली से प्रचंड लहर ने सरकारी व्यवस्थाओं व शासन-प्रशासन की अक्षमता उजागर कर दी।

लोग योगी सरकार को उनके गलत फैसलों व कमियों के नाते कोसने लगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम-11 हो या टीम-9, कोई भी प्रदेश में कोरोना के चलते हो रहे त्राहिमाम को काबू में नहीं कर पा रहा था।

इन सबके बीच प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सहित समूचे पूर्वांचल में कोविड नियंत्रण का कार्य एक ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया जो चंद दिनों पहले तक गुजरात कैडर का आइएएस अधिकारी था और प्रधानमंत्री मोदी का बेहद विश्वसनीय। वो शख्स थे ए.के. शर्मा, जिन्हें वीआरएस दिलवाकर उप्र से भाजपा ने एमएलसी बनाया।

New BJP member Arvind Sharma is part of Modi's Mission 2022 in UP - India  Today Insight News

अपने 30 सालों के प्रशासनिक अनुभव, क्षमता एवं कर्मठता के बूते ए.के. शर्मा ने वो कर दिखाया जो प्रदेश के अन्य किसी क्षेत्र में नहीं नजर आया। प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर शत-प्रतिशत खरा उतरते हुए ए.के. शर्मा ने कोविड नियंत्रण के काशी मॉडल को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया।

अब इन्ही एमएलसी ए.के. शर्मा को उप्र में बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर भाजपा 2022 की चुनावी वैतरणी पार करने का स्वप्न देख रही है। स्वप्न इसलिए क्योंकि मोदी सरकार द्वारा विगत सात वर्षों में किए गए तमाम अच्छे कार्यों के बावजूद भाजपा वर्तमान नेतृत्त्व के बल पर उप्र में दोबारा सत्ता हासिल करने में सफल होती नहीं दिख रही है। नेतृत्त्व परिवर्तन की मांग पार्टी में ही जोर-शोर से उठ रही है।

अब बात अगर एमएलसी ए.के. शर्मा की करें तो उनके साथ कई प्लस पॉइंट हैं, एक तो नौकरशाही को काबू में रखने की योग्यता दूसरे उनकी कर्मठता एवं मिलनसार व मृदुल स्वभाव तीसरे प्रधानमंत्री मोदी की तरह देश में विकास की गंगा बहाने की उत्कट इच्छा।

यहाँ ए.के. शर्मा के विषय में कुछ जानना उचित होगा। ए.के. शर्मा ने गुजरात में प्रशासनिक अधिकारी रहते हुए कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। नरेंद्र मोदी विकास के जिस गुजरात मॉडल का उदहारण बराबर दिया करते थे उसमे ए.के. शर्मा का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।

बात चाहे गुजरात में टाटा के लखटकिया कार के प्लांट को स्थापित करने की रही हो या भुज व कच्छ में आए भूकंप के बाद राहत व पुनर्वास की; गुजरात में निवेशकों को लुभाने वाले कार्यक्रम वाईब्रेंट गुजरात को आयोजित करना हो या नरेंद्र मोदी व अमेरिका के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलाने की बात हो, ए.के. शर्मा गुजरात को गुजरात बनाने वाली सभी मुख्य योजनाओं के चीफ आर्किटेक्ट रहे हैं।

pm modi ak sharma

इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी के आंखो के तारे रहे ए.के. शर्मा मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही पीएमओ में नियुक्त कर दिए गए और तबसे 2020 में वीआरएस लेकर एमएलसी बनने तक पीएमओ में ही रहे व पीएम मोदी से सीधे जुडी योजनाओं के क्रियान्वित करते रहे। 

एक बात और महत्त्वपूर्ण है कि उप्र में विधानसभा की सबसे ज्यादा सीटें पूर्वांचल से आती हैं, इस मामले में भी ए.के. शर्मा खरे उतरते हैं क्योकि वो पूर्वांचल के मऊ जनपद के मूल निवासी हैं और कोविड नियंत्रण के दौरान पूर्वांचल के लगभग 22 जनपदों में अच्छी पकड़ बना चुके हैं।

साथ ही ए.के. शर्मा को सभी जाति, धर्म व समुदाय का समर्थन प्राप्त है क्योंकि उन्होंने इन सबसे ऊपर उठकर मानवता की सेवा की है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा ऐसे योग्य व्यक्ति आगे ला ती है या उन्ही पुराने चेहरों पर दांव लगाती है।

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