
‘वे प्रभु श्रीराम नहीं, बाबर को मानने वाले लोग हैं’; योगी का अखिलेश पर तीखा हमला…
CM Yogi vs Akhilesh Yadav: अयोध्या दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राम मंदिर, विपक्ष और समाजवादी पार्टी को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राम नगरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल 378 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, बल्कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले दलों को भी कठघरे में खड़ा किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी आस्था भगवान श्रीराम में नहीं, बल्कि बाबर की विचारधारा में दिखाई देती है। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि जब समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक मनोज कुमार पांडेय ने सभी विधायकों को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने का सुझाव दिया था, तब अखिलेश यादव ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था।
‘रामभक्ति नहीं, बाबर की मानसिकता’
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना स्पष्ट करती है कि कुछ राजनीतिक दलों की निष्ठा भगवान श्रीराम के प्रति नहीं रही। उन्होंने कहा कि जो लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे, वे आज राजनीतिक परिस्थितियों के कारण रामभक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करोड़ों रामभक्तों की आस्था का प्रतीक है, लेकिन कुछ दलों ने वर्षों तक इसके निर्माण में बाधाएं खड़ी करने का प्रयास किया।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के अस्तित्व तक पर सवाल उठाए गए और न्यायालय में मंदिर निर्माण को रोकने के लिए बड़े-बड़े वकीलों को खड़ा किया गया।
योगी ने कहा कि कांग्रेस ने हर स्तर पर राम मंदिर निर्माण में अड़ंगा लगाने का प्रयास किया, लेकिन देश की जनता और न्यायपालिका के निर्णय के सामने उनकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।
सपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकारों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन के दौरान रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाई गईं और “जय श्रीराम” का उद्घोष करने वालों पर लाठियां बरसाई गईं।
उन्होंने कहा कि उस दौर में आस्था को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन आज वही लोग रामभक्तों के सम्मान की बातें कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता।
378 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण
राजनीतिक हमलों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने अयोध्या में 378 करोड़ रुपये से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
इस अवसर पर उन्होंने राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया और वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का भी अनावरण किया।
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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण की जांच का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कर रही हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में उससे जुड़ी हर व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
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अयोध्या से दिया राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि आगामी राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखते हुए विपक्ष पर वैचारिक और राजनीतिक हमला भी था।
राम मंदिर, रामभक्ति और सांस्कृतिक विरासत के मुद्दे को केंद्र में रखकर योगी ने एक बार फिर भाजपा की वैचारिक राजनीति को मजबूती से सामने रखा। वहीं उनके बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस छिड़ने की संभावना भी बढ़ गई है।
अयोध्या से दिया गया यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
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