कुशल प्रशासनिक अधिकारी से दमदार जनसेवक बन चुके हैं एमएलसी ए.के. शर्मा

mlc ak sharma

लखनऊ। उप्र की राजनीति में 2021 जनवरी के मध्य में एक शख्स का आगमन हुआ जिसने पीएमओ में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (सचिव स्तर) के पद से दो वर्ष पूर्व ही वीआरएस लेकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और एक सप्ताह के भीतर की विधानपरिषद का सदस्य बना दिए गए। उस शख्स का नाम है ए.के. शर्मा।

आज उप्र की जटिल राजनीति में ए.के. शर्मा का नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रह गया है। ए.के. शर्मा के राजनीति में उतरते ही चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया।

पीएम मोदी के बेहद करीबी रहे ए.के.शर्मा को कभी डिप्टी सीएम का दावेदार तो कभी राज्य का गृहमंत्री बनाए जाने की चर्चा भी मीडिया की सुर्खियां बनती रहीं।

अंततः उन्हें प्रदेश भाजपा का उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया। एक कर्मठ व कुशल प्रशासनिक अधिकारी को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने उनका अच्छा उपयोग किया है।

वैसे भी उप्र भाजपा की राजनीति देश के सभी प्रान्तों की पार्टी की राजनीति से हटकर है। विभिन्न खेमों में बंटी भाजपा द्वारा एक ऐसे व्यक्ति, जिसने उनके सबसे लोकप्रिय नेता (पीएम मोदी) के राजनीतिक सफ़र को सुनहरा बनाने में योगदान किया हो, उसका बहुत अच्छा उपयोग पार्टी कर रही है।

उप्र की राजनीति में एक जुमला बहुत चर्चित है ‘उप माने चुप’। यानि उपाध्यक्ष या कोई भी डिप्टी का पद चुप रहने वाला ही होता है लेकिन शर्मा जी यहां भी भारी पड़ते दिख रहे हैं।  

यूपी भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को एक पत्र लिखा जिसमें दिया तो उन्होंने धन्यवाद है लेकिन पत्र की भाषा राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों को भी सोचने पर मजबूर कर देगी।

पत्र में उन्होंने कई ऐसी बातों का जिक्र किया है जिससे यह प्रतीत होता है कि शर्मा जी को सिर्फ पीएम मोदी का करीबी या चहेता कहना उनके साथ इंसाफ नहीं होगा बल्कि ए.के शर्मा की कार्यप्रणाली उन्हें जमीन से जुड़ा एक ऐसा व्यक्ति बनाती है जितना कोई और राजनेता अपने को बताता है।  

ए.के. शर्मा द्वारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को 20 जून को लिखा गया यह पत्र वैसे तो धन्यवाद ज्ञापित करने वाला पत्र लगता है लेकिन पत्र की शब्दावली बीते कुछ महीनों के उनके राजनैतिक सफ़र के संघर्ष की कहानी कहती है।

ए.के. शर्मा ने बहुत सधे शब्दों में बता दिया कि भाजपा का उप्र के लिए मिशन 2022 फतह का सपना सिर्फ पीएम मोदी के नेतृत्त्व में ही साकार हो सकता है और यह बात प्रदेश में वर्तमान समय में स्थापित लोगों को सोचनी होगी कि इतने प्रचंड बहुमत की बाद भी वो उतनी लोकप्रियता हासिल क्यों नहीं कर सके? जबकि विपक्ष 2017 के चुनाव की बाद से ही हताश व निराश है।

एमएलसी ए.के. शर्मा

ए.के. शर्मा गुजरात कैडर के बेहद सफल व कार्यकुशल अधिकारी रहे हैं और इसके लिए पुरस्कृत भी हो चुके हैं वो भी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आधिकारिक रूप से जुड़ने से पहले।

यह बात भी उन्होंने पत्र में अपने शब्दों द्वारा बता दी है ताकि उन्हें सिर्फ पीएम मोदी के आभामंडल से न आंका जाय। बता दें कि ए.के. शर्मा 2001 में के आधिकारिक सचिव बने थे और तभी से मोदी के बेहद करीबी हैं।

ak sharma pm modi

ए.के. शर्मा को हाई-फाई अधिकारी बताकर उनके राजनैतिक शासन चलाने पर संदेह व्यक्त करने वालों को तो उन्होंने हालांकि कोरोना की दूसरी लहर में अपने कार्यों के माध्यम से जवाब दे ही दिया था लेकिन पत्र में भी इन सब बातों का जवाब छुपा हुआ है।

पत्र में उन्होंने ढंके छुपे शब्दों में यहां तक कह दिया 2014 के चुनाव के समय पर्दे के पीछे मोदी की गुजरात टीम ने ही सब कुछ संभाला था। पीएम मोदी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि उनकी चरम लोकप्रियता आज भी क़ायम है।

यूपी आने के बाद से लगातार सक्रिय रहे ए.के. शर्मा ने वाराणसी एवं पूर्वांचल में कोविड की दूसरी लहर के दौरान जिस तरह काम करते हुए पूरे देश में काशी मॉडल को उदाहरण बना दिया उसका गुणगान पीएम मोदी ने भी किया था। बावजूद इसके उन्होंने इसका पूरा श्रेय पीएम मोदी के मार्गदर्शन को दिया जो उनके विनम्र व्यक्तित्त्व की एक झलक है।

ak sharma in varansi

2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर पत्र में साफ़तौर यह कहना कि, ‘मोदी के नाम पर ही उप्र का आगामी विधान सभा चुनाव जीत जाएँगे’, क्षेत्रीय नेताओं पर एक व्यंग है जो कई मायनों में सच भी है क्योंकि भाजपा में मोदी की लोकप्रियता आज भी नंबर वन है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता कि ए.के. शर्मा का यह पत्र अपने आप में एक संदेश है जो शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया गया है।

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