UP Elections 2027: ‘आधी आबादी’ पर टिकी सबकी नजर, महिला वोट बैंक को साधने में जुटी पर्टियां

UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य की राजनीति में ‘आधी आबादी’ (महिला वोट बैंक) की बढ़ती भूमिका को देखते हुए राज्य की दो प्रमुख पार्टियों – भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) – ने महिलाओं को अपने पाले में लाने के लिए बड़े अभियानों और चुनावी वादों की घोषणा करना शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में महिला मतदाताओं का टर्नआउट और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों ही महिला केंद्रित नीतियों और योजनाओं को अपनी रणनीति का मुख्य हिस्सा बना रहे हैं।

योगी सरकार का दांव

भारतीय जनता पार्टी महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को अपने सबसे बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में पेश कर रही है। योगी सरकार अपने कार्यकाल के दौरान बेहतर कानून-व्यवस्था और ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियानों को अपनी मुख्य उपलब्धि बता रही है। महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को बढ़ावा दिया जा रहा है और महिला कल्याण से जुड़ी वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।

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अखिलेश यादव का पलटवार

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी महिलाओं को साधने के लिए अपने PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सोशल इंजीनियरिंग मॉडल के साथ-साथ आर्थिक सम्मान राशि का दांव खेल रही है।

अखिलेश यादव ने सत्ता में आने पर महिलाओं को विशेष आर्थिक सहायता और पेंशन प्रदान करने का आश्वासन दिया है। डिंपल यादव सहित पार्टी की महिला नेता लगातार महिला अपराधों, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रही हैं।

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क्यों अहम है महिला वोट बैंक?

उत्तर प्रदेश के पिछले कुछ चुनावों (2017, 2019, 2022 और 2024) के आंकड़ों पर नजर डालें तो महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में कई सीटों पर अधिक रहा है। साइलेंट वोटर के रूप में उभरा यह वर्ग किसी भी राजनीतिक दल के जीत का समीकरण बनाने या बिगाड़ने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है।

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