
UP News: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर टली सुनवाई, जानें हाई कोर्ट ने क्या कहा…?
UP Panchayat Chunav: यूपी में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टाल दी है। जानिए कोर्ट की सख्त टिप्पणी।
UP Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक (Administrators) नियुक्त करने के योगी सरकार के फैसले को लेकर चल रहा विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अपनी सुनवाई को अगले 6 हफ़्तों के लिए टाल दिया है। अदालत ने इसके पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि चूंकि इस मामले की सुनवाई पहले से ही लखनऊ बेंच की एक डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित है, इसलिए इस चरण पर सिंगल बेंच द्वारा इस पर सुनवाई करना संभव नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में काम जारी रखने का फैसला किया था। सरकार के इसी फैसले को चुनौती देते हुए बलिया की राज कुमारी देवी और सहारनपुर के अरविंद राठौर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इन दोनों याचिकाओं को एक साथ संबद्ध (क्लब) कर दिया था।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ (Single Bench) ने इस मामले की सुनवाई की। इससे पहले कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि “ग्राम प्रधानों को प्रशासक के तौर पर काम जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्हें दोबारा इस पद पर नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का सीधे तौर पर उल्लंघन और अदालत की अवमानना (Contempt of Court) के समान है।”
कोर्ट ने साफ कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-E और 243-K के तहत पंचायतों का कार्यकाल केवल 5 वर्ष के लिए निर्धारित है और चुनाव समय पर ही होने चाहिए।
चुनाव में देरी पर कोर्ट ने जताई थी हैरानी
राज्य सरकार ने चुनावों में देरी की वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को बताया था। इस पर हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी और हैरानी व्यक्त की थी कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी। फिलहाल, अब इस पूरे मामले पर अगले 6 हफ़्तों बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।





