
UP News: दहेज समेत इन मामलों में दर्ज नहीं होगी FIR, डीजीपी ने दिए सख्त निर्देश
UP News: डीजीपी राजीव कृष्ण ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया है कि जिन मामलों में कानूनन केवल परिवाद का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज न की जाए।
UP News: उत्तर प्रदेश में पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। डीजीपी ने निर्देश दिया है कि कुछ श्रेणी के मामलों में बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इन मामलों में पहले तथ्यों की पुष्टि की जाएगी, उसके बाद ही मुकदमा दर्ज होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य झूठे केस, सिविल विवाद और पारिवारिक झगड़ों को अनावश्यक रूप से आपराधिक मामलों में बदलने से रोकना है।
किन मामलों में पहले जांच, फिर FIR
डीजीपी के निर्देश के अनुसार ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं होगी-
- पारिवारिक विवाद (पति-पत्नी, रिश्तेदारी)
- दहेज उत्पीड़न से जुड़े विवाद
- जमीन-जायदाद या संपत्ति विवाद
- पैसे के लेन-देन और रिकवरी विवाद
- कॉन्ट्रैक्ट/व्यापारिक समझौते के झगड़े
- व्यावसायिक लेन-देन विवाद
- साझेदारी/कंपनी विवाद
- देरी से दर्ज कराई गई शिकायतें
- मेडिकल लापरवाही के आरोप
- भ्रष्टाचार से जुड़े कुछ शिकायत मामले
- निजी समझौते से जुड़े विवाद
(इसी तरह कुल लगभग 30 श्रेणियों को सूचीबद्ध किया गया है)
इन मामलों में गजटेड अधिकारी द्वारा जांच की जाएगी और जिला पुलिस प्रमुख की अनुमति के बाद ही FIR दर्ज होगी। जांच अधिकतम 14 दिनों में पूरी करनी होगी।
क्यों लिया गया फैसला
- झूठे मुकदमों की संख्या कम करने के लिए
- सिविल विवादों को क्रिमिनल केस बनने से रोकने के लिए
- पुलिस पर अनावश्यक केस का दबाव कम करने के लिए
- वास्तविक अपराधों की जांच तेज करने के लिए
डीजीपी ने साफ कहा कि अगर जांच में मामला आपराधिक पाया गया तो तुरंत एफआईआर दर्ज होगी, अन्यथा शिकायत को सिविल प्रकृति मानकर बंद किया जा सकता है। नियमों का पालन न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी।





