Ayodhya दीपोत्सव में अद्भुत कला का भी मंचन, पांच देशों के कलाकार देंगे प्रस्तुति

Deepotsav 2025: रामनगरी अयोध्या का दीपोत्सव इस बार पहले से भी खास होने जा रहा है। इस बार 2000 से ज्यादा कलाकार अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन करेंगे। इनके लिए कुल 11 मंच बनाए जा रहे हैं।

Deepotsav 2025: दीपों की रोशनी से जगमगाती अयोध्या इस बार और भी भव्यता का दर्शन कराएगी। दीपोत्सव 2025 को लेकर नगर में अपार उत्साह है। इस वर्ष का आयोजन हजारों दीपों की ज्योति के साथ हजारों कलाकारों की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से भरा होगा। रामनगरी के हर कोने में भक्ति और लोक संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा।

रूस- सीता स्वयंवर का अद्भुत मंचन

रूस से आए 15 कलाकार सीता स्वयंवर के प्रसंग का मंचन करेंगे. रूसी रंगमंच की शास्त्रीय तकनीक और भारतीय कथा की भावनात्मक गहराई का यह मेल दर्शकों को अद्वितीय अनुभव देगा. रूस के कलाकारों ने कई महीनों तक भारतीय संगीत और अभिव्यक्ति शैली पर प्रशिक्षण लिया है ताकि वे राम और सीता के दिव्य मिलन की भावना को सजीव कर सकें.

थाईलैंड- धर्म और अधर्म का संघर्ष

थाईलैंड की टीम ‘शूर्पणखा प्रसंग’, ‘मारीच वध’ और ‘राम-रावण युद्ध’ जैसे युद्ध दृश्यों का मंचन करेगी. थाई संस्कृति में रामकथा को “रामाकियन” के नाम से जाना जाता है, और उसकी झलक इस मंचन में दिखेगी. पारंपरिक नृत्य और वेशभूषा इस प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बनाएंगे.

इंडोनेशिया- लंका दहन से अयोध्या वापसी तक

इंडोनेशिया के कलाकार हनुमान द्वारा लंका दहन और श्रीराम की अयोध्या वापसी के प्रसंगों को अपने प्रसिद्ध “वेयांग कुलित” नाट्यशैली में प्रस्तुत करेंगे. यह प्रदर्शन दर्शकों को श्रीराम के जीवन के निर्णायक क्षणों से जोड़ देगा.

नेपाल- पहली बार लक्ष्मण पर शक्ति प्रदर्शन

नेपाल की टीम इस वर्ष पहली बार ‘लक्ष्मण पर शक्ति प्रदर्शन’ का मंचन करेगी. अब तक नेपाल की रामलीला मुख्यत सीता और राम के प्रसंगों पर केंद्रित रही है, लेकिन इस बार दर्शक लक्ष्मण के साहस और त्याग की झलक देख पाएंगे. 33 कलाकारों की यह टीम नेपाली पारंपरिक वेशभूषा और संगीत के साथ कथा को नया आयाम देगी.

श्रीलंका- रावणेश्वरा प्रसंग की भावनात्मक प्रस्तुति

श्रीलंका से आए 22 कलाकार रावण के चरित्र को उसकी सांस्कृतिक दृष्टि से प्रस्तुत करेंगे. श्रीलंका में आज भी रावण को विद्या, शक्ति और भक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. उनकी प्रस्तुति ‘रावणेश्वरा’ के रूप में उस भाव को मंच पर साकार करेगी। यह प्रसंग दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगा कि रामकथा केवल युद्ध नहीं, बल्कि मूल्य और दृष्टिकोण का संवाद भी है.

अयोध्या के रामकथा पार्क में 17 से 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव में लगभग 90 विदेशी कलाकार अपनी पारंपरिक कलाओं, नृत्य शैलियों और नाट्य विधाओं के माध्यम से श्रीराम की कथा को जीवंत करेंगे. यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव और साझा मूल्यों का उत्सव भी होगा।

 

 

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