
दलाल से डॉक्टर तक कनेक्शन! कानपुर किडनी रैकेट में चौंकाने वाले खुलासे
Kanpur News: अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े नेटवर्क को लेकर हुई छापेमारी में कानपुर शहर के 3 नामी अस्पतालों का नाम आया है। जिन अस्पतालों में छापेमारी की गई, उनमें आहूजा, मेड लाइफ़ और प्रिया हॉस्पिटल शामिल है।
Kanpur Kidney Racket: कानपुर CMO और पुलिस की टीम ने किडनी खरीद फरोख्त के रैकेट का भांडाफोड़ किया है. लंबे समय से कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के नर्सिंग होम में किडनी ट्रांसप्लांट का काम किया जा रहा था. लगातार छापेमारी जारी है. पुलिस टीम के रडार पर दो दर्जन से ज्यादा नर्सिंग होम, अस्पताल कई जगह छापेमारी हुई है. कल्याणपुर, सूत्रों के मुताबिक, रावतपुर थाना क्षेत्र के कई नर्सिंग होम पुलिस टीम के रडार पर है।
पर्दाफाश होने से मचा हड़कंप
रिपोर्ट के मुताबिक कल्याणपुर और रावतपुर क्षेत्र में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक बड़े नेटवर्क के पर्दाफाश होने से शहर में हड़कंप मच गया है. छापेमारी में हिरासत में लिए लोगों के बारे में कुछ कहने से पुलिस अभी बच रही है. पुलिस अधिकारी अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े नेटवर्क के पर्दाफाश होने के बाद जांच पूरी होने तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रही हैं.
प्रलोभन देकर किया जाता था किडनी डोनेट
सूत्रों के अनुसार, सुनियोजित तरीके से संचालित किए जा रहे रैकेट में बाहरी राज्यों के लोगों को आर्थिक प्रलोभन देकर कानपुर बुलाया जाता था और उन्हें किडनी डोनेट करने के लिए तैयार किया जाता था. इसके बाद शहर के निजी अस्पतालों में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी. पूरे नेटवर्क में बिचौलियों की भूमिका अहम बताई जा रही है, जो डोनर और मरीज के बीच संपर्क स्थापित करते थे.
बड़े सर्जन के अस्पताल का कर्मचारी करता था दलाली
पुलिस ने जिस ब्रोकर शुभम को इस मामले में हिरासत में लिया है वह शहर के एक बड़े किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन के अस्पताल में नौकरी करता था। वहां पर कानपुर समेत आसपास के कई जिलों के पेशेंट किडनी का इलाज कराने आते हैं। जिन्हें अपनी बातों में फंसाकर शुभम उनका किडनी ट्रांसप्लांट करने का झांसा देता था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
10 से 15 गुना मुनाफे में बेचते थे किडनी
पुलिस ने जांच में पाया कि गैंग डोनर को 8 से 10 लाख रुपए में ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करता था। फिर मरीज की आर्थिक पृष्ठभूमि देखकर 70 से 80 लाख लेकर किडनी बेची जाती थी। कई बार तो डोनर को चार से पांच लाख रुपये ही थमाकर चलता कर दिया जाता था। आयुष ने भी पहले यही बताया कि उसे चार लाख रुपये दिए थे।
पुलिस को जानकारी मिली है कि लखनऊ से डॉक्टरों की टीम यहां आकर किडनी ट्रांसप्लांट किया करती थी। बाद में डोनर और रिसीवर को छोटे-छोटे अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था।





