UP एटीएस ने डॉ. आरिफ को उठाया; देश विरोधी नेटवर्क में डॉ शाहीन से कनेक्शन…

Delhi Blast: डॉ आरिफ जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग इलाके का रहने वाला है और कानपुर के अशोक नगर में किराए के फ्लैट में रह रहा था। UP ATS ने पूछताछ के लिए मोहम्मद आरिफ को हिरासत में लिया है।

Delhi Blast: यूपी के कानपुर में मेडिकल के छात्र को हिरासत में लिया गया है। मोहम्मद आरिफ नाम का ये छात्र कानपुर में कार्डियोलॉजी की पढ़ाई कर रहा है। UP ATS ने पूछताछ के लिए मोहम्मद आरिफ को हिरासत में लिया है। ATS को शक है कि ये डॉ शाहीन के संपर्क में था। एटीएस ने इसे अशोक नगर इलाक़े से इसके किराए के कमरे से हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। बुधवार रात यूपी ATS ने उसके ठिकाने पर छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया।

डॉ शाहीन के संपर्क में था डॉ आरिफ

डॉ शाहीन भी साल 2006 से 2013 तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में काम कर चुकी है. कानपुर मेडिकल कॉलेज और हृदय रोग संस्थान एक ही कैंपस में मौजूद है. ये भी कहा जा सकता है कि डॉक्टर शाहीन और डॉक्टर आरिफ एक ही कैंपस में रहते थे. चर्चा है कि ये दोनों लंबे समय से एक दूसरे साथ मिलकर देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े हुए थे.

डॉ आरिफ की गिरफ्तारी के बाद कानपुर में डॉ शाहीन के नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं. पुलिस को डॉ शाहीन को जो मोबाइल फ़ोन मिला हैं उसमें दोनों के बीच एसएमएस के ज़रिए बात किए जाने की का जानकारी सामने आई है. इस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट इस समय सात ऐसे छात्र हैं जो जम्मू-कश्मीर से हैं और यहां से डीएम की पढ़ाई कर रहे हैं।

निजी जिंदगी और कट्टरता की तरफ झुकाव

शाहीन का निकाह 2004 में प्रयागराज के नेत्र चिकित्सक डॉ. जफर सईद से हुआ था, लेकिन दोनों का 2015 में तलाक हो गया। तलाक के बाद वह लखनऊ में अपने परिवार के साथ रह रही थी, लेकिन पिछले डेढ़ साल से परिवार से उसका संपर्क टूट गया था। पूर्व पति डॉ. जफर ने बताया कि शाहीन धीरे-धीरे धार्मिक और कट्टर विचारों की तरफ झुकने लगी थी। वह मुस्लिम लड़कियों को हिजाब और बुर्का पहनने की सलाह देने लगी थी। जबकि उसके पुराने साथी बताते हैं कि पहले वह खुली सोच और प्रोग्रेसिव विचारों वाली थी और बुर्के के खिलाफ रहती थी।

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फिलहाल, ATS ने डॉ. आरिफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। दोनों डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत, फोन कॉल्स और सोशल मीडिया चैट्स की गहराई से जांच की जा रही है। ATS और केंद्रीय एजेंसियाँ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह आतंकी नेटवर्क से जुड़ा कोई बड़ा प्लान था।

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